विषय सूची
- १. प्रस्तावना
- २. मेरी पृष्ठभूमि
- ३. बाल्यावस्था तथा साधना के लिए मेरी प्रेरणा
- ४. गर्भधारण करने में मेरी असमर्थता – पृष्ठभूमि
- ५. साधना आरम्भ करने पर एक अद्भुत घटना चक्र उजागर होना
- ६. मेरी बांझपन की समस्या पुनः उत्पन्न होना तथा अधिक तीव्र होना
- ७. एक चमत्कारी शिशु का जन्म होना
- ८. वर्तमान स्थिति
- ९. अध्यात्मशास्त्र का स्पष्टीकरण : क्रिस्टीना के बांझपन के मूल कारण क्या थे ?
- १०. महिलाओं में बांझपन से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने के उपाय
- ११. निष्कर्ष
- १२. ग्रन्थ सूची
१. प्रस्तावना
महिलाओं के लिए, इस बात से अधिक हृदय विदारक कोई और बात नहीं हो सकती जब उन्हें पता चलता है कि वे बांझ हैं अथवा संतान पैदा करने में असमर्थ हैं । गर्भ धारण करने में असमर्थता अथवा बांझपन महिलाओं के लिए एक गहरी और स्थाई पीड़ा होती है , जो दुर्भाग्य से बहुत सामान्य बात है । आजकल (वर्तमान में), विश्वभर में ८ से १२ प्रतिशत दंपत्ति बांझपन से पीडित हैं (कुमार और सिंह, 2015 )। बांझपन के उपचार के तनाव से गर्भ धारण करने के लिए संघर्ष कर रहे एक दंपत्ति की कठिन परीक्षा, और अधिक तीव्र हो जाती है ।
अनेक दम्पतियों के लिए स्थिति और भी बदतर होने का एक कारण यह भी है कि लगभग एक-चौथाई मामलों में बांझपन का कारण अज्ञात होता है। (सोमिग्लिआना, एट अल., 2016 )। गर्भावस्था और गर्भाधान से संबंधित समस्याओं के निदान में, आधुनिक विज्ञान सामान्यतः आनुवंशिक, जैविक और मनोवैज्ञानिक कारणों पर ध्यान केंद्रित करता है । पर क्या हम समस्या के उस आधारभूत कारण की उपेक्षा कर रहे हैं? और वह कारण है – गर्भ धारण करने की और एक स्वस्थ संतान को जन्म देने की हमारी क्षमता पर सूक्ष्म आयाम का प्रभाव होना ।
इस अनुभव कथन में क्रिस्टीना ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा साझा की है कि कैसे उन्होंने आध्यात्मिक मूल कारणों को समझ कर, उन पर उपचार किये तथा गर्भधारण करने में लंबे समय से चली आ रही अपनी असमर्थता के साथ-साथ कई स्त्री रोग संबंधी समस्याओं पर विजय प्राप्त की ।
२. मेरी पृष्ठभूमि

मेरा नाम क्रिस्टीना सांता क्रूज है । मैं बोलिविया में रहती हूं और मैं व्यवसाय से जीव वैज्ञानिक हूं । मैंने नि:संतान होने की अपनी समस्या का हल ढूंढा। पहले मैं आपके साथ अपने प्रारंभिक वर्षों की कुछ पृष्ठभूमि साझा करना चाहूंगी, कि कैसे बाल्यकाल से ही अध्यात्म के प्रति मेरे झुकाव ने, मेरी समस्याओं के मूल आध्यात्मिक कारणों पर विजय प्राप्त करने में मेरी सहायता की ।
३. बाल्यावस्था तथा साधना के लिए मेरी प्रेरणा
आठ सदस्यों के परिवार में मैं सबसे छोटी बेटी थी । मेरी मां की अध्यात्म में रुचि थी, और मुझे विश्वास है कि वह अपने आसपास के लोगों की तुलना में अपनी छठवीं इंद्रिय के माध्यम से स्थिति को कहीं अधिक समझने में सक्षम थी । मुझे स्मरण है कि मेरी मां सदैव सूक्ष्म जगत के प्राणियों जैसे बौने और देवदूतों के अस्तित्व के बारे में बातें करती थी । इसके अतिरिक्त, मेरी माँ ने मृत्यु को इतने निकट से देखा कि उसने अपने शरीर को पुनर्जीवित होते हुए देखा था। इसके अतिरिक्त, घर में पराभौतिकी विषय पर कई पुस्तकें उपलब्ध थीं, इन सब बातों ने और मेरी मां के अनुभवों ने मुझे सम्प्रदाय के परे कुछ खोजने के लिए प्रेरित किया ।
४. गर्भधारण करने में मेरी असमर्थता – पृष्ठभूमि
अधिकांश महिलाओं की तरह, मुझे भी सन्तान प्राप्ति की तीव्र इच्छा थी । यद्यपि, यह मेरे लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि मुझे दीर्घकालीन स्त्रीरोग-संबंधी अनेक समस्याएं थीं । मेरा मासिक धर्म अनियमित था और मैं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीडित थी। यह एक हार्मोनल विकार होता है जो बांझपन, गर्भपात अथवा संतान के समय से पहले जन्म होने का कारण बन सकता है । पीसीओएस का सटीक कारण अज्ञात है । (मेयो क्लीनिक, २०१७)
ये भी निदान हुआ था कि मेरी गर्भाशय ग्रीवा अक्षम है। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें कुछ कारणों से, बच्चे के जन्म से बहुत पहले गर्भाशय ग्रीवा खुल जाती है । इस रुग्ण अवस्था को 15 से २०% गर्भपात होने के साथ-साथ समय से पहले प्रसव होने का कारण माना जाता है (येट्स, २०१०) ।
मैं केवल २ बार गर्भधारण करने में सक्षम हुई थी, पर वे अत्यंत जटिल थे । अपने अंडाशय में बीजों को परिपक्व होने और गर्भधारण संभव होने के लिए मुझे दवाइयाँ लेनी पडी । एक बार गर्भवती होने के बाद, मुझे बहुत थकान अनुभव हुई । मैं भोजन नहीं पचा पा रही थी और लगातार मतली और उल्टी आना, हृदय में जलन होना, सर्दी, मूत्र पथ के संक्रमण, योनि में संक्रमण से पीडित हो रही थी अंततः मुझे पूर्ण विश्राम की आवश्यकता थी । मेरी गर्भाशय ग्रीवा असक्षम थी , जिस कारण दोनों ही गर्भधारण में गर्भपात हो गए ।
अंततः डॉक्टर ने मुझसे कह दिया कि मेरी गर्भाशय ग्रीवा की अक्षमता के कारण मेरे लिए संतान को जन्म देना अति कठिन है । मैं टूटगई थी, क्योंकि मैं वास्तव में मां बनना चाहती थी । पर मुझे पता था कि इसकी आशा करना व्यर्थ था ।
५. साधना आरम्भ करने पर एक अद्भुत घटना चक्र उजागर होना
मैंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा २०१० के अंत में आरम्भ की। मेरा सहकर्मी कुछ ऐसी वस्तुओं का उपयोग कर रहा था जिन्हें मैंने पहले कभी नहीं देखा था।। मैंने जिज्ञासा वश अपने सहयोगी उन वस्तुओं के बारे में पूछा । तब मेरे सहयोगी ने SSRF की कुछ अगरबत्तियां मुझे दीं। मैं अपनी आध्यात्मिक यात्रा कैसे आरंभ कर सकती हूं, इसके बारे में एक लेख के बारे में भी मुझे बताया ।
मेरे सहकर्मी ने मुझे ईश्वर का नामजप करने की साधना भी सिखाई । यद्यपि नामजप करना मेरे लिए नया था, फिर भी मुझे इसमें तुरंत रुचि उत्पन्न हुई और इसका प्रयास करने की इच्छा हुई । जब से मैंने नामजप आरंभ किया, मेरे मन में अध्यात्म के बारे में और अधिक प्रश्न उत्पन्न हुए और मैं SSRF द्वारा आयोजित सत्संगों में भाग लेने लगी ।
अगले कुछ महीनों में, जैसे-जैसे साधना के विषय में मेरे ज्ञान और जागरूकता में वृद्धि हुई, मैंने वैश्विक नामजप के साथ-साथ पितृ दोष दूर करने के लिए श्री गुरुदेव दत्त का नामजप करना आरम्भ किया । मैंने स्वभावदोष निर्मूलन (पीडीआर) के साथ-साथ SSRF द्वारा बताए गए न्यास और नमक पानी के उपचार जैसे विभिन्न आध्यात्मिक स्व-उपचार पद्धतियों का अभ्यास करना प्रारंभ किया ।
साधना प्रारंभ करने के उपरांत, मुझमें गर्भ धारण कर पाने की आशा पुनः निर्माण हुई । सर्वोत्तम चिकित्सा परामर्श लेने के लिए मुझे आंतरिक शक्ति और प्रेरणा प्राप्त हुई और मैं अपने नगर के प्रमुख चिकित्सा केंद्र में गई । डॉक्टरों ने आश्चर्यजनक रूप से अब यह निदान किया कि मेरी गर्भधारण की संभावनाएं अच्छी हैं। गर्भाधान वास्तव में सहज रूप से और लगभग अप्रत्याशित रूप से हुआ । डॉक्टर ने मेरी गर्भावस्था के पहले तीन महीनोंकी कालावधि में यात्रा करने के लिए भी अनुमति दे दी ।
अपनी पूरी यात्राओं के दौरान, मैं अब तक किए गए नामजप की अवधि की तुलना में कहीं अधिक नामजप कर सकी । मैंने अपने पति में भी अत्यधिक परिवर्तन देखा । उन्होंने कहा कि वे अपने व्यक्तित्व में सुधार करना चाहते हैं और उन्होंने धूम्रपान छोडने का निश्चय भी किया । अपनी यात्रा से लौटने पर, समय से पहले प्रसव को रोकने के लिए मैंने cerclage (गर्भाशय ग्रीवा की सिलाई) नामक चिकित्सा प्रक्रिया करवाई थी।इस ऑपरेशन के उपरांत, मुझे बेड रेस्ट करने और अपनी शारीरिक गतिविधियों को सीमित करने का परामर्श दिया गया ।
६. मेरी बांझपन की समस्या पुनः उत्पन्न होना तथा अधिक तीव्र होना
मेरी गर्भावस्था के २०वें सप्ताह से, मुझे कूल्हे में तीव्र पीडा होने लगी थी, डॉक्टर्स का मानना था कि यह एक नर्व के कारण हो सकता है जो कदाचित मेरी गर्भावस्था के कारण प्रभावित हो गई है । उस समय से, मेरा स्वास्थ्य क्षीण होना आरम्भ हो गयाऔर मुझे एक बार फिर गर्भपात जैसी स्थिति का सामना करना पडा । मेरी देह से एमनियोटिक द्रव्य (गर्भाशय में व्याप्त एक तरल पदार्थ जो स्वस्थ भ्रूण के विकास के लिए महत्वपूर्ण है) का चिंताजनक मात्रा में स्राव आरम्भ हो गया । मुझे एक गंभीर और जीवन के लिए संकट बनने वाली स्थिति का भी पता चला, जिसे placental abruption के रूप में जाना जाता है । (इसमें गर्भ जन्म से पूर्व ही अपने नाल से अलग हो जाता है। ) मेरी स्थिति में इसका परिणाम भ्रूण की मृत्यु के रूप में हो सकता था ।) (हान, शाट्रज एंड लॉकवुड,२०११).
मेरी अनेक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण, पच्चीसवें सप्ताह, में डॉक्टर्स ने भ्रूण के फेफडों के विकास को कृत्रिम रूप से तीव्र कर दिया । छब्बीसवें सप्ताह में, गर्भनाल लगभग पूर्ण रूप से टूट चुका था और मेरे गर्भाशय में शेष एमनियोटिक द्रव्य लगभग पूर्णरूप से समाप्त हुआ था। इस कारण आपातकालीन ऑपरेशन द्वारा मेरा प्रसव कराया गया । ऐसे में, मेरी शिशु का जन्म तो हुआ लेकिन वह अत्यंत गंभीर अवस्था में थी।

इस अपार भय और निराशा के काल में, जब मेरे शिशु का जीवन संकट में था, तब साधना से मुझे शक्ति और स्थिरता प्राप्त हुई । मैंने नमक के पानी का उपाय, न्यास और श्री गुरुदेव दत्त नामजप करने के लिए SSRF के संत सदगुरु सिरियाक वालेजी के (सदगुरु उन संत को कहा जाता है जिनका आध्यात्मिक स्तर ८० -८९ % के मध्य होता है) मार्गदर्शन का पालन किया । मैंने प्रत्येक रात्रि नमक के पानी का उपाय किया और स्वभाव दोष निर्मूलन के प्रयास किए जिससे मुझे मानसिक तनाव और भय से मुक्त होने में सहायता मिली । इस कठिन समय में मुझे SSRF के मार्गदर्शक साधकों से भी सहायता मिली ।
७. एक चमत्कारी शिशु का जन्म होना

अनेक बाधाओं के पश्चात भी , ईश्वर की कृपा से मेरी पुत्री फ्लोरेंस का जन्म हुआ, जिसका वजन मात्र ७२० ग्राम था । नियोनेटल इंटेंसिव केयर में उसने लगभग तीन सप्ताह व्यतीत किए । फ्लोरेंस के जीवन के ये पहले तीन सप्ताह अत्याधिक संकटपूर्ण थे, क्योंकि फ्लोरेंस कृत्रिम वेंटिलेशन पर थी । उसे हाइपोक्सिया ( रक्त में ऑक्सीजन का भयानक रूप से कम स्तर का होना) का तीव्र कष्ट था और उसे एक से अधिक बार पुनर्जीवित किया जाता था । यह केवल ईश्वर में मेरा विश्वास ही था जिसने मुझे इस अत्यंत कठिन काल में सहायता की ।
बाद में फ्लोरेंस को एक इनक्यूबेटर में तब तक स्थानांतरित कर दिया गया जब तक कि उसका वजन दो किलो तक नहीं पहुंच गया। इस कालावधि में, मैं उसके इनक्यूबेटर में भगवान श्री कृष्ण का एक चित्र रखती थी और उसके लिए नामजप करती थी । फ्लोरेंस के चिकित्सालय से छूटने के बाद भी, उसके समयपूर्व जन्म के कारण, मुझे लगभग पांच महीनों तक अतिरिक्त प्राणवायु के माध्यम से उसे श्वास लेने में सहायता करनी पड़ती थी । एक संकट यह भी था कि हो सकता था कि वो पूरी तरह से श्वास लेना बंद कर दे । इसलिए जब वो सोती थी तब मैं उसकी श्वास पर दॄष्टि रखने के लिए एपनिया मॉनिटर का उपयोग करती थी।
फ्लोरेंस की मांसपेशियां शक्ति हीन थीं और उसके स्नायुओं में ढीलापन था, जो अवधिपूर्व जन्मे शिशुओं में सामान्य बात है । परिणामस्वरुप , उसे रेंगने (शिशु का घुटनों के बल चलना) और चलने में कठिनाई होती थी और आज तक भी लिखने में कुछ कठिनाइयां होती हैं । इसके निवारण हेतु, मैं उसे बचपन से ही फिजियोथेरेपिस्ट और साइकोमोटर विशेषज्ञों के पास ले जा रही हूं ।
८. वर्तमान स्थिति

फ्लोरेंस के स्वास्थ्य में प्रतिदिन सुधार हो रहा है । वह अभी भी सिकुड़े हुए फेफडों और ब्लड ऑक्सीजन की कमतरता से पीडित है पर फिर भी उसके सर्दी और निमोनिया के दौरे कम होते जा रहे हैं । फ्लोरेंस के जन्म के समय उसपर हुए मानसिक आघात के पश्चात भी, मैंने उसमें कोई मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं देखी है । अल्पायु होने पर भी, वह खुल कर संवाद करती है, आत्मनिरीक्षण करती है और जीवन की परिस्थितियों का कुशलता से विश्लेषण करती है ।
फ्लोरेंस में ईश्वर के बारे में एक सहज जिज्ञासा है और उसके प्रश्न इस प्रकार के होते हैं जैसे ईश्वर हमारे भीतर क्यों है और मैं उनके निकट कैसे आ सकती हूं । फ्लोरेंस को बुरे सपने भी आते हैं और श्वास की एलर्जी होती है। मुझे लगता है कि यह पितृ दोष के कारण हो सकता है ।
आज भी मुझमें ओवेरीअन सिस्ट और हार्मोन असंतुलन है, किन्तु मेरी स्त्री रोग विशेषज्ञ ने आश्वासन दिया है कि इसके लिए चिंता की कोई बात नहीं है ।

फ्लोरेंस के जन्म के आसपास की घटनाओं को देखते हुए, मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी साधना के कारण वो इस संसार में है। इसके लिए साधना के प्रति मैं कृतज्ञ हूँ।
गर्भावस्था के दौरान मेरे लिए साधना का विषय नया था, फिर भी मैंने नामजप करने और स्व-उपचार पद्धतियों को करने के लिए गंभीर प्रयास किए । परिणामतः , फ्लोरेंस का रक्षण हुआ । उसके जन्म को तथा जन्मोपरांत हुए स्वास्थ्य लाभ को डॉक्टर्स ने किसी चमत्कार से कम नहीं माना ।
९. अध्यात्मशास्त्र का स्पष्टीकरण : क्रिस्टीना के बांझपन के मूल कारण क्या थे ?
आध्यात्मिक शोध के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं के पिता-माता बनने में असमर्थ होने के 50% कारण आध्यात्मिक (पितृ दोष और अनिष्ट शक्ति की बाधाएं ) होते हैं । यदि डॉक्टर रोगी की गर्भधारण करने में हो रही कठिनाई का कारण नहीं बता पाता या उसे ‘unexplained fertility problem’ कहता है, तो ये एक संकेत है कि ये समस्या आध्यात्मिक हो सकती है।
गर्भावस्था की अवधि में होने वाली 40% जटिलताएं भी आध्यात्मिक कारणों से होती हैं । शारीरिक और मनोवैज्ञानिक घटक का केवल 30% योगदान होता है । आध्यात्मिक घटक गर्भपात में और भी व्यापक भूमिका निभाते हैं, क्योंकि 70% गर्भपात आध्यात्मिक कारणों से होते हैं ।
कुछ मृत पूर्वजों के पास कुछ आध्यात्मिक शक्ति होती है अथवा वे मांत्रिकों जैसी शक्तिशाली अनिष्ट शक्तियों की सहायता से गर्भ में ही माता और भ्रूण को टारगेट कर सकते हैं।निम्न कारणों के लिए पूर्वज ऐसा करते हैं :
- आध्यात्मिक स्तर पर मृत पूर्वज के लिए परिवारवाले कुछ पर पाएं , इसलिए उनका ध्यान आकर्षित करना
- गर्भस्थ शिशु के सूक्ष्म शरीर पर नियंत्रण पाना
- भ्रूण को यातना देकर प्रतिशोध लेना
- गर्भ/भ्रूण को प्रभावित करके उसके माध्यम से माता को गर्भावस्था की अवधि में पीडा देकर उससे प्रतिशोध लेना । इन केसेस में , माता की गर्भावधि सामान्यतः कष्टदायक होती है, जैसे कि गर्भावस्था में अत्यधिक मतली और उल्टी होना, व उच्च रक्तचाप होना इत्यादि ।
- भ्रूण को कष्ट देकर अभिभावकों से प्रतिशोध लेना
- शिशु में व्यसन का बीजारोपण करना
१०. महिलाओं में बांझपन से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने के उपाय
जिन समस्याओं का मूल कारण आध्यात्मिक है,, उनका समाधान केवल आध्यात्मिक माध्यमों से ही किया जा सकता है । अत:, माता-पिता साधना के द्वारा गर्भावस्था तथा गर्भधान से संबंधित समस्याओं को कम अथवा पूर्णतः समाप्त कर सकते हैं । आगे कुछ आध्यात्मिक उपाय दिए गए हैं जिनका पालन माता-पिता कर सकते हैं :
- शिशु को जन्म देने की योजना बनाते समय और गर्भ धारण करने के लिए संभोग से पहले, माता-पिता प्रार्थना कर सकते हैं कि शिशु /भ्रूण आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और श्री गुरुदेव दत्त, देवताओं के इन नामों का जप करें (फाइल्स को डाउनलोड करने के लिए लिंक पर क्लिक करें) । घर के परिसर में नामजप सुनना अच्छा होता है क्योंकि यह उसे आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करता है । मृत पूर्वजों के कारण होने वाली गर्भधारण की समस्या श्री गुरुदेव दत्त के नाम जप से दूर हो सकती है ।
- यदि संभव हो, तो गर्भधारण के लिए नियमित आध्यात्मिक उपचार करना भी लाभदायक होता है, जैसे कि घर में चारों ओर, SSRF की प्रज्वलित अगरबत्ती घुमाकर घर का आध्यात्मिक शुद्धिकरण करना, आदि।
- कुल मिलाकर प्रारब्ध की तीव्रता को न्यून करने के लिए, साधना के छह मूल सिद्धान्तों के अनुसार साधना करने का परामर्श SSRF देती है ।
- गर्भावस्था की अवधि में होने वाली जटिलताओं को टालने अथवा कम करने के लिए, आध्यात्मिक सुरक्षा प्राप्त करने के लिए माता-पिता नामजप और आध्यात्मिक उपाय कर सकते हैं। इससे गर्भावस्था से संबंधित समस्याओं के आध्यात्मिक मूल कारणों पर नियन्त्रण प्राप्त होगा । यदि बाधाएं आनेवाली हों, तो भी साधना करने वाले माता-पिता को इनसे ऊपर उठने की आंतरिक शक्ति प्राप्त होगी । साधना करने से बाधाओं की गंभीरता कम हो जाती है ।
११. निष्कर्ष
हम आशा करते हैं कि यह लेख भावी माता-पिता को यह सीखने में सहायता करेगा कि गर्भाधान से पहले, गर्भावस्था की अवधि में और प्रसव में आध्यात्मिक उपायों को कैसे अपनाएं ताकि जन्म लेने वाला शिशु स्वस्थ और आध्यात्मिक रूप से सुरक्षित रहे ।
१२. ग्रन्थ सूची
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