अपने जालस्थल पर (वेबसाइट पर) अध्यात्म शास्त्र शोध संस्थान ने (एस.एस.आर.एफ ने) नियमित ‘साधना’ के महत्त्व पर व्यापक रूप से बल दिया है ।

इस अनुभाग का प्रयोजन है – ‘आज ही अपनी साधना आरंभ करने हेतु आप क्या कर सकते हैं’, यह तुरंत समझ पाने में आपकी सहायता करना ।

आप चाहे किसी भी धार्मिक पंथ अथवा संस्कृति से संबद्ध हों, अध्यात्म शास्त्र शोध संस्थान आपको तत्काल करने-योग्य निम्नलिखित तीन बातें सुझाना चाहेगा, जिससे आपकी आध्यात्मिक यात्रा आरंभ हो अथवा उसमें सहायता हो ।

१. अपने जन्म-पंथ के अनुसार देवता के नाम का जप करना

हमारा जन्म उसी पंथ में होता है, जो हमारी आध्यात्मिक यात्रा आरंभ करने हेतु अनुकूल है । अतएव हम अपने पंथानुसार देवता के जिस रूप अथवा प्रतीक की उपासना करते हैं, वही हमारी आध्यात्मिक यात्रा के वर्तमान चरण में सर्वाधिक लाभदायक होता है । प्रत्येक पंथ के अनुसार देवता के विभिन्न नाम, एक परमेश्‍वर के विभिन्न रूपों के प्रतिनिधि हैं । अपने जन्म-पंथ के अनुसार देवता का नामजप कर हम ईश्‍वर के उस रूप को पुकारते हैं और उनकी दिव्य शक्ति आत्मसात करते हैं । यह सामान्य आध्यात्मिक घुट्टी की (टॉनिक की) भांति है, जिसकी हमें सर्वाधिक आवश्यकता रहती है ।

आइए देखते हैं जन्म-पंथ के अनुसार हमें कौन से देवता का नामजप करना चाहिए, इसके कुछ उदाहरण

नामजप सम्बन्धी कुछ सुझाव :

. जैसा सुविधाजनक हो, वैसे नामजप करें आप मन ही मन में, मौखिक रूप से अथवा माला लेकर जप कर सकते हैं । आपके लिए जो सुविधाजनक है, वह पद्धति अपना सकते हैं ।

 

 

. कभी भी, कहीं भी आप कहीं भी, कभी भी जप कर सकते हैं । उदा. कार्यालय जाते समय, भोजन बनाते हुए अथवा कुत्ते को घुमाते समय भी नामजप कर सकते हैं ।

 

 

 . नामजप की संख्या :  जितना अधिक नामजप करेंगे, उतना अधिक आध्यात्मिक लाभ होगा । आप पांच मिनट प्रतिदिन से आरंभ कर सकते हैं और कुछ माह में उसे बढाकर कुछ घंटे कर सकते हैं । इसे अनेक सत्रों में कर सकते हैं अथवा ऊपर बताए अनुसार अन्य कार्य जैसे भोजन बनाते हुए कर सकते हैं ।

 

 

. नामजप नियमित करें : लगन से नामजप का प्रयास करने पर आप ऐसी शांति अनुभव कर पाएंगे, जो आपने पहले कभी अनुभव नहीं की । आपके सांसारिक जीवन में भी सुधार होने लगेगा ।

 

 

संक्षेप में :  इस साधना के लिए न्यूनतम ६ माह के लिए यथा क्षमता उत्तम प्रयास करें । आपको अपने जीवन में लाभ ही होगा ।


. पूर्वजों की अतृप्ति के कारण होने वाले कष्ट (पितृदोष) से रक्षा हेतु संरक्षक नामजप

आज विश्‍व में लगभग सभी लोग पितृ दोष से (पूर्वजों की अतृप्ति के कारण होने वाले कष्टों से) त्रस्त हैं । इस विषय पर विस्तृत जानकारी अनुभाग पितृ दोष (पूर्वजों की अतृप्ति के कारण होने वाले कष्ट) में दी है ।

भगवान दत्तात्रेय ईश्‍वर का वह रूप हैं, जो पितृ दोष से हमारी रक्षा करता है । उनके नामजपसे पितृ दोष के निवारण हेतु हमारे लिए सुरक्षा कवच बनता है ।

वास्तविक नामजप है ॥ श्री गुरुदेव दत्त ॥ यह सुरक्षात्मक नामजप सुनने के लिए यहां क्लिक करें ।

॥ श्री गुरुदेव दत्त ॥ नामजप संबंधी सुझाव  

  • मात्रा : हमारा सुझाव है कि पितृ दोष की तीव्रता के अनुसार आप ॥ श्री गुरुदेव दत्त ॥ नामजप की संख्या निर्धारित करें । पितृ दोष के कारण उत्पन्न कष्ट अथवा समस्याआें का प्रकार समझने हेतु हमारा लेख – पितृ दोष (पूर्वजों की अतृप्ति के कारण होने वाले कष्ट) की व्याख्या क्या है ? अवश्य पढें ।

1. यदि पितृ दोष न हो अथवा मंद हो, तो भविष्य में इससे बचने हेतु प्रतिदिन १ अथवा २ माला ॥ श्री गुरुदेव दत्त ॥ नामजप करें ।

२. यदि पितृ दोष मध्यम हो, तो प्रतिदिन २ से ४ घंटे ॥ श्री गुरुदेव दत्त ॥ नामजप करें ।

३.  यदि पितृ दोष तीव्र हो, तो प्रतिदिन ४ से ६ घंटे ॥ श्री गुरुदेव दत्त ॥ का नामजप करें ।

टिप्पणी : कुछ काल पूर्व दी गई सूचना के अंतर्गत नामजप की तुलना में अब संख्या बढाई गई है । वर्तमान और भविष्य में पितृदोष और अनिष्ट शक्तियों की पीडा में वृद्धि के कारण यह संख्या बढाई गई है ।

  • अपनी सुविधा के अनुसार : आप इसे एक बार में अथवा अनेक भिन्न सत्रों में कर सकते हैं ।

३. अपना आध्यामिक ज्ञान बढाना

अध्ययन : अध्यात्म शास्त्र के विभिन्न अंगों के अध्ययन से आपको नियमित साधना का महत्त्व ज्ञात होगा । इससे आपकी शंकाआें का समाधान भी होगा । निम्नलिखित खंड अथवा लेख पढना आपके लिए उपयुक्त होगा ।

  • शाश्वत सुख हेतु आध्यात्मिक शोध तथा साधना के छः मूलभूत सिद्धांत
  • साधना सम्बन्धी अनुभाग

टिप्पणी : अपने अनुभव निःसंकोच बताएं तथा साधना आरंभ करने के उपरांत मन में उभरे कोई भी प्रश्न पूछें ।