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१. मेकअप पर आध्यात्मिक शोध की प्रस्तावना
शैंपू, कंडीशनर, इत्र (परफ्यूम), लोशन, फाउंडेशन, मस्कारा जैसे अनेक सौंदर्यप्रसाधनों के बिना संसार की कल्पना करना कठिन है । सौंदर्य प्रसाधनों के प्रति हमारे लगाव का कारण है सुंदर दिखने और स्वयं को सुंदर अनुभव करने की हमारी धुन है (और यह आशा कि इससे लोग हमें अलग प्रकार से देखेंगे) । किन्तु क्या सौंदर्य प्रसाधनों की एक परत वास्तव में हमें सुंदर बनाती है ? हम अपने सौंदर्य प्रसाधनों से बहुत प्रेम करते हैं, परंतु क्या वे वास्तव में हमारी देखभाल करते हैं?
आप किस सर्वेक्षण को देख रहे हैं, इसके आधार पर, ८०-९५ % महिलाएं मेकअप करती हैं, जिनमें से कम से कम ७०% महिलाएं बताती हैं कि वे बिना मेकअप के घर से बाहर नहीं निकलती हैं । सदियों से, महिलाओं ने सुंदरता के सांस्कृतिक मानकों को पूरा करने के प्रयास में मेकअप किया है । सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग मुख की कुछ विशेषताओं को बढाने के लिए, तथा अन्य विकृतियों को छुपाने हेतु किया जाता है । जिन गुणों को हम प्रायः सुंदर मानते हैं, वे हमारे भीतर स्वाभाविक रूप से होते हैं तथा कामुकता, स्वास्थ्य और युवावस्था जैसे प्रजनन अनुरूपता के संकेत होते हैं । मेकअप के उपयोग से महिलाओं को लाल होंठ, एकसमान त्वचा, आकर्षक आंखों और गालों पर थोडी सी लालिमा मिलती है, इसके साथ ही एक सुंदर नए चेहरे का आत्मविश्वास भी मिलता है । यह सब कम से कम जैविक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महिलाओं के आकर्षण में वृद्धि करता है । शोध से पता चलता है कि मेकअप से महिलाओं के प्रति हमारी धारणा महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तित हो सकती है ।
पर्यावरण कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) और सार्वजनिक हित और पर्यावरण स्वास्थ्य संगठनों के तत्त्वावधान में २,३०० से अधिक लोगों द्वारा व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद के उपयोग पर किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि औसत वयस्क प्रतिदिन ९ व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों का उपयोग करता है, जिसमें १२६ अद्वितीय रासायनिक तत्व होते हैं । कुछ समय से सौन्दर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक) उद्योग की नकेल कसने और इन रसायनों के भौतिक प्रभाव को समझने पर जोर दिया जा रहा है ।
मेकअप के आध्यात्मिक प्रभावों के विषय में ऐसे गैर-लाभकारी समूह और सरकारी निकाय कल्पना भी नहीं कर पाते और इसलिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन में नीतिगत निर्णय लेते समय इस विषय पर कभी चर्चा नहीं की जाती । भारत के गोवा स्थित स्पिरिचुअल साइंस रिसर्च फाउंडेशन और महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने हाल ही में स्त्रियों द्वारा मेकअप करने के आध्यात्मिक प्रभाव समझने के लिए एक शोध परियोजना आरम्भ की । शोध अभी भी अपने आरंभिक चरण में है, किन्तु निष्कर्ष (किसी भी ब्रांड के) नियमित मेकअप के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बहुत कुछ बताते हैं । हम निष्कर्षों को अपने पाठकों के साथ साझा करना चाहते थे ताकि वे मेकअप के उपयोग पर अधिक जागरूकता के साथ निर्णय ले सकें ।
२. कार्यप्रणाली – मेकअप संबंधी प्रयोग
इस प्रकार के विश्लेषण को मात्र एक उन्नत स्तर की छठी इंद्रिय का उपयोग कर पूर्ण किया जा सकता है । यद्यपि, आजकल प्रभा मंडल और सूक्ष्म ऊर्जा स्कैनर के विकसित होने के कारण, हम कुछ सीमा तक वस्तुओं से जुडे सूक्ष्म स्पंदनों को मापने में सक्षम हुए हैं ।
महिलाओं पर मेकअप के प्रभाव को मापने के लिए हमने जिस प्रभामंडल और सूक्ष्म ऊर्जा स्कैनर का उपयोग किया, वह यूनिवर्सल थर्मो स्कैनर (यूटीएस) है । यह डॉ मन्नम मूर्ति (भारत के एक पूर्व परमाणु वैज्ञानिक) द्वारा विकसित एक उपकरण है और इसका उपयोग सूक्ष्म ऊर्जा (सकारात्मक और नकारात्मक) एवं किसी भी वस्तु (जीवित अथवा निर्जीव) के आसपास के प्रभामंडल को मापने के लिए किया जाता है ।
नकारात्मक ऊर्जा के पाठ्यांक (रीडिंग) २ प्रकार के होते हैं और इन्हें आई आर (इन्फ्रारेड) और यूवी (अल्ट्रा वायलेट) द्वारा दर्शाया जाता है । उपकरण के अनुसार, इन्फ्रारेड नकारात्मक स्पंदनों के लघु रूप को दर्शाता है और अल्ट्रा वायलेट नकारात्मक स्पन्दनों के अधिक तीव्र रूप को दर्शाता है । शोध दल ने इस उपकरण का व्यापक रूप से उपयोग किया है, अर्थात ५ वर्ष की अवधि में वस्तुओं के १०,००० पाठ्यांक लिए गए हैं और यह देखा गया है कि यूटीएस बहुत सीमा तक सटीक है और छठी इंद्री के माध्यम से प्राप्त अन्य निष्कर्षों की पुष्टि करता है ।
अब तक जिन ९ व्यक्तियों ने प्रयोग में भाग लिया है, वे विभिन्न देशों से आईं शोधकेंद्र की साधिकाएं हैं । उन्हें दो प्रकार का मेकअप धारण करने के लिए कहा गया, अर्थात हल्का मेकअप (दैनिक उपयोग के लिए) और भारी मेकअप (जिसका उपयोग वे शाम को बाहर जाने पर करती हैं) । हमने मेकअप के प्रत्येक प्रकार को धारण करने से ठीक पूर्व और पश्चात महिलाओं के प्रभामंडल और सूक्ष्म ऊर्जा को मापा ।
हमने प्रभाव की अवधि को समझने के लिए प्रत्येक घंटे महिलाओं के पाठ्यांक (रीडिंग) लेना जारी रखा और मूल पाठ्यांक पर पुनः आने पर ही पाठ्यांक लेना बंद किया । हमने महिलाओं से कहा कि वे ईश्वर का नामजप न करें अथवा कोई साधना न करें अथवा किसी प्रबल उद्दीपक के संपर्क में न आएं; जिससे मेकअप के प्रभाव की अभिन्नता बनी रहे । सौंदर्य प्रसाधनों के नकारात्मक प्रभाव को न्यून करनेवाले दो संभावित सकारात्मक उद्दीपक हैं :
- आध्यात्मिक शोधकेंद्र और आश्रम के वातावरण के अत्यधिक सकारात्मक उद्दीपक
- साधिकाओं का स्वयं का औसत से अधिक आध्यात्मिक स्तर
तत्पश्चात, हमने उन्हें कुमकुम जैसा सात्त्विक (आध्यात्मिक रूप से शुद्ध) उत्पाद लगाने के लिए भी कहा । कुमकुम हल्दी से बना एक लाल चूर्ण (पाउडर) होता है । यह आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होता है और हिन्दू महिलाएं इसे आध्यात्मिक सुरक्षा के लिए अपने आज्ञा चक्र पर लगाती हैं । यहां भी कुमकुम लगाने से पूर्व और पश्चात महिलाओं के प्रभामंडल और सूक्ष्म ऊर्जा को मापा गया ।
३. प्रारंभिक प्रमुख निष्कर्ष मेकअप करने के सूक्ष्म प्रभाव
३.१ सामान्यतः सर्वत्र प्रचलित मेकअप का उपयोग
व्यावसायिक रूप से उपलब्ध मेकअप जैसे फाउंडेशन, ब्रोंजर, कंसीलर, आईलाइनर, ब्लश, आईशैडो, लिपस्टिक आदि को लगाने के प्रभाव के कुछ प्रमुख निष्कर्ष आगे दिए हैं । साधिकाओं द्वारा उपयोग किया गया मेकअप और सौंदर्य प्रसाधन प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का था ।
- सभी महिलाओं में नकारात्मकता बढना
- वे साधिकाएं जिन्हें आरंभ में कुछ कष्ट थे (अर्थात उनके इन्फ्रा रेड पाठ्यांक थे), उनके द्वारा मेकअप करने के कुछ ही मिनटों में उनके आईआर पाठ्यांक में अत्यधिक वृद्धि हुई । वृद्धि लगभग ४० प्रतिशत से २३० प्रतिशत तक की थी ।
- मूल पाठ्यांक पर निष्कर्ष पुनः आने से पूर्व साधिका के आसपास (मेकअप करने के कारण) उत्पन्न नकारात्मकता २-४ घंटे तक बढती रही ।
- अधिकांश प्रकरणों में, यूवी पाठ्यांक भी देखे गए, जो आध्यात्मिक कष्ट के अधिक तीव्र रूप को दर्शाते हैं ।
- जिन साधिकाओं को मेकअप करने से पहले कोई कष्ट नहीं था, उन पर भी नकारात्मक प्रभामंडल निर्मित हुआ (जो इन्फ्रारेड और अल्ट्रा वायलेट दोनों प्रकार का था)। उदाहरण के लिए, एक साधिका जिसका यूटीएस प्रयोग से पूर्व कोई इन्फ्रारेड और अल्ट्रा वायलेट पाठ्यांक नहीं था, मेकअप के पश्चात उसकी नकारात्मकता के ३.६९ मीटर (इन्फ्रारेड) और १.८४ मीटर (अल्ट्रावायलेट) के नकारात्मक पाठ्यांक दर्ज किए गए ।
- हल्के मेकअप की तुलना में भारी मेकअप का औसतन अधिक नकारात्मक प्रभाव पडता है ।
- मेकअप के उपकरणों का भी लगाने के पूर्व और तुरंत पश्चात प्रभामंडल मापा गया था । वे भी उपयोग के पश्चात और अधिक नकारात्मक हो गए । यह इस प्रकार था जैसे उनमें कुछ नकारात्मक स्पंदन केवल उनका उपयोग करने से सक्रिय हो गए ।
३.२ मेकअप के सात्त्विक विकल्पों का उपयोग
- कुमकुम लगाने के पश्चात, साधिकाओं की सकारात्मकता व्यापक रूप से बढी, जो सहज स्पष्ट थी ।
- जिन साधकों को कष्ट था, उनमें से कुछमें अस्थायी रूप से आध्यात्मिक कष्ट के सभी लक्षणों दूर हो गए और यथार्थ में एक सकारात्मक प्रभामंडल प्राप्त हुआ ।
- इसका सकारात्मक प्रभाव १-३ घंटे तक रहा ।
आजकल लोग व्यावसायिक रूप से (हाट में) उपलब्ध विभिन्न आकृतियों और आकारों में काला तरल कुमकुम लगाते हैं । स्वरुप और रंग के प्रकार भी धारण करनेवाले को प्रभावित करते हैं । नीचे दिए चित्रों में कुमकुम लगाने के विभिन्न प्रकारों और शैलियों के प्रभावों को देखा जा सकता है ।

उपरोक्त तालिका से यह देखा जा सकता है कि लाल कुमकुम लगाने से, साधिका की पूरी कष्टदायक शक्ति दूर हुई और साथ ही ४ मीटर का सकारात्मक प्रभामंडल निर्मित हुआ । जबकि हाट के काले कुमकुम से बने काले गोल और सर्पीले आकार से, उसके नकारात्मक प्रभामंडल में बहुत वृद्धि हो गई ।
साधिका के मुख के संबंध में, यह देखा जा सकता है कि काले गोलाकार काले और सर्पीले आकार से मुख के स्पंदन किस प्रकार अधिक नकारात्मक हो गए । जबकि लाल कुमकुम से मुख के स्पंदन अधिक सुखद होते हैं ।
अतः इस प्रयोग से यह देखा जा सकता है कि प्रतीक का रंग और आकार धारण करनेवाले को आध्यात्मिक रूप से अत्यधिक प्रभावित कर सकता है ।
४. मेकअप के उपयोग के विषय में मुख्य बिन्दु
हम एक ऐसे विश्व में रहते हैं जो हमें मेकअप के उपयोग को सामान्य और आवश्यक मानने की स्थिति निर्माण करता है । यद्यपि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मेकअप के बारे में कुछ भी सामान्य नहीं है, और वस्तुतः मेकअप करनेवाले को गहन नकारात्मक स्पंदनों के कारण असामान्य माना जा सकता है । शोध से ज्ञात हुआ है कि जब भी कोई मेकअप करता है, वह वास्तव में आध्यात्मिक कष्ट का लेप लगाता है, और इससे दूर रहना (बचना) ही उसके हित में होगा । दूसरी ओर, कुमकुम एक ऐसी वस्तु है, जिसे व्यक्ति को अपने आज्ञा चक्र पर लगाने पर विचार करना चाहिए; क्योंकि यह कष्टदायक स्पंदनों से रक्षा करता है और व्यक्ति की आध्यात्मिक सकारात्मकता को बढाता है ।
सुंदरता के वर्तमान मानक बाह्य सुंदरता पर केंद्रित है, किन्तु मेकअप किसी व्यक्ति को अधिक सुंदर अथवा प्रिय नहीं बनाता है । यह एक मुखौटे के अतिरिक्त और कुछ नहीं है, जो देखनेवाले को नकारात्मक स्पंदन प्रदान करता है और व्यक्ति के प्राकृतिक रूप को विकृत करता है । व्यक्ति की आंतरिक सुंदरता सबसे महत्वपूर्ण है, किन्तु यह दुर्लभ भी है । बाह्य सुंदरता आकर्षित कर सकती है, किन्तु वह आंतरिक सुंदरता है, जो हमें अधिक प्रिय बनाती है । आंतरिक सौन्दर्य केवल नियमित साधना से ही प्राप्त किया जा सकता है, जो स्त्री के स्वभाव दोषों और अहं को न्यून करके उसकी आध्यात्मिक पवित्रता (सात्त्विकता) में वृद्धि करता है । आध्यात्मिक शुद्धता के कारण स्त्री के मुख पर जो तेज आता है, वह उसे आकर्षक बनाने में अद्वितीय होती है । आध्यात्मिक शोध केंद्र और आश्रम में, कोई भी साधिका मेकअप नहीं करती और फिर भी आश्रम के कई आगंतुकों ने ऐसा बताया है कि उनके चेहरों पर वह तेज है, जो उन्होंने कहीं और नहीं देखा ।

