नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

१. भारत के गोवा स्थित अध्यात्म शोध केंद्र एवं आश्रम में गुडी पडवा पर्व मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

उस दिन जब उषाकाल से अंधकार दूर होने लगा था तथा हमें एक नए सूर्योदय के लिएतैयार कर रहा था, उस समय अध्यात्म शोध केंद्र तथा आश्रम में वायु में एक अनोखी शांति एवं शीतलता अनुभव हो रही थी । प्रतिदिन की तरह पहाडियों के पीछे से जब सूर्य उदय हुआ, तब आस पास के खेत खलिहान एवं वनों से कोयल की विशिष्ट (मधुर)ध्वनि  सुनाई दे रही थी ।

जो भी हो, यह सूर्योदय विशिष्ट था ।

यह हिन्दू नव चंद्र वर्ष का आरंभ था, जिसे लोकप्रिय रूप से गुडी पडवा कहा जाता है । यह पर्व भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है तथा इसका संबंध वसंत ऋतु के आने के साथ भी जुडा होता है । जब वृक्ष एवं कोहरे से छनकर सूर्य की प्रथम किरणें अध्यात्म शोध केंद्र तथा आश्रम पहुंचीं, तब गुडी पडवा का पर्व आरंभ हुआ ।

रंग बिरंगे पारंपरिक वत्र पहने साधक एवं द्वार पर लगे फूलों के बंदनवारों के साथ वातावरण बहुत ही आनंदमय (उत्सवभरा) लग रहा था । उत्सव के साथ, पर्व में भाग लेनेवाले साधकों ने कहा कि वे अपने चारों ओर अत्यधिक मात्रा में चैतन्य एवं आध्यात्मिक उपचार के स्पंदन को सहजता से अनुभव कर पा रहे थे । संस्कृत मंत्रों की ध्वनि ने वायु को भारित कर दिया था तथा प्रज्वलित उदबत्ती की सुगंध चारों ओर फैल रही थी; इस समारोह की पवित्रता को अनुभव न कर पाना कठिन था । चारों ओर दृष्टि घुमाने पर कुछ साधकों को ध्यानावस्था में, तो कुछ को भावावस्था में देखा जा सकता था ।

१.१. नव वर्ष का अनुवर्ती (आगे का) प्रयोग – पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य

नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

गुडी पडवा पर्व में उपस्थित साधकों में वह भी समूह था, जिसने ३१ दिसंबर २०१८ – १ जनवरी २०१९ को नव वर्ष के उत्सव में भाग लिया था । सामान्य नव वर्ष का उत्सव मनाने के सूक्ष्म प्रभाव को समझने हेतु शोध दल के अध्ययन के एक भाग के रूप में उन्होंने ऐसा किया था । SSRF ने पूर्व में ही नव वर्ष के आध्यात्मिक प्रभाव के संबंध में निष्कर्ष प्रकाशित किए थे ।

गुडी पडवा का पर्व पारंपरिक रूप से जिस प्रकार मनाया जाता है, वह नव वर्ष मनाने की पद्धति से बिलकुल विपरीत है, आध्यात्मिक शोध दल उनके आध्यात्मिक प्रभाव में अंतर जानने हेतु उत्सुक था । तदनुसार, SSRF एवं महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने पारंपरिक रूप से गुडी पडवा मनाने के सूक्ष्म प्रभाव पर एक अनुवर्ती अध्ययन किया, जिसके परिणाम नीचे दिए गए हैं ।

२. महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि

नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभावमहर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय भारत के गोवा में स्थित है । महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय एवं अध्यात्म शास्त्र शोध संस्था निर्लाभ (नॉन प्रॉफिट)संगठन हैं, जो पूरे विश्व के ऐसे स्वयंसेवकों द्वारा चलाए जाते हैं तथा जो एक समान लक्ष्य के लिए समर्पित हैं, अर्थात आध्यात्मिक उन्नति एवं सत्य की खोज । दोनों संगठनों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना एवं आकलन करना है कि हमारे निर्णय एवं दैनिक दिनचर्या हमें आध्यात्मिक स्तर पर कैसे प्रभावित करती है । इस उद्देश्य से यह शोध दल भारत के गोवा स्थित अध्यात्म शोध केंद्र एवं आश्रम में संयुक्त रूप से विविध प्रयोग एवं शोध परियोजनाओं को पूर्ण करते हैं । २०१९ तक, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के अध्यात्म शोध दल के पास आध्यात्मिक शोध का ३८ वर्षों का अनुभव है ।

३. गुडी पडवा के दिन नव वर्ष मनाने के प्रभाव का अध्ययन करने का प्रयोग

३.१ कार्यप्रणाली

अ. प्रयोग में भाग लेनेवाले साधकों के उदाहरण के संदर्भ में नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

  • इस प्रयोग में अध्यात्म शोध केंद्र एवं आश्रम के १० साधकों ने भाग लिया । (वे १२ साधकों के उसी समूह से थे, जिन्होंने नव वर्ष के प्रयोग में भाग लिया था । पिछले समूह के दो साधक भाग नहीं ले सके ।)
  • इन १० साधकों को ६ अप्रैल २०१९ को सूर्योदय के समय गुडी पडवा के समारोह में भाग लेने के लिए कहा गया था ।
  • प्रयोग में भाग लेनेवाले सभी साधक नियमित रूप से साधना करते हैं, इसलिए उनका आध्यात्मिक स्तर सामान्य व्यक्ति से अधिक है । इसके साथ ही  साधना के कारण उनकी छठी इंद्रिय जागृत होती है तथा वे सूक्ष्म स्पंदनों को अनुभव कर सकते हैं ।
  • समूह में सम्मिलित कुछ साधकों को आध्यात्मिक कष्ट था, कुछ को नहीं ! अर्थात वे आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक थे । ‘आध्यात्मिक कष्ट क्या है’ ?, , लेख का संदर्भ लें ।

समूह में सम्मिलित करने हेतु दोनों वर्गों का चयन करने का कारण यह है कि विश्व की जनसंख्या का एक बडा भाग आध्यात्मिक कष्ट से ग्रस्त है तथा दोनों वर्गों पर गुडी पडवा मनाने के प्रभाव का अंतर समझना महत्त्वपूर्ण था ।

चित्र का शीर्षक : स्थापना के उपरांत पवित्र गुडी (ब्रह्मध्वज) को नमस्कार करते साधक । गुडी एक पवित्र प्रतीक है, इसे ब्रह्मध्वज भी कहा जाता है ।

आ. प्रयोग में उपयोग किए उपकरण के विषय में

आध्यात्मिक शोध दल ने गुडी पडवा का पर्व मनाने के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए अपने साधकों की अति जागृत छठी इंद्रिय के साथ ही प्रभामंडल एवं ऊर्जा स्कैनर जिसे यूनिवर्सल थर्मो स्कैनर भी कहते हैं, का प्रयोग किया । साधक प्रतिभागियों के पाठ्यांक लेने हेतु यूनिवर्सल थर्मो स्कैनर (यूटीएस) (जिसे यूनिवर्सल प्रभामंडल स्कैनर भी कहते हैं) का प्रयोग समारोह के पूर्व एवं पश्चात किया गया ।

नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

यूटीएस, डॉ. मन्नेम मूर्ति (भारत के एक पूर्व परमाणु वैज्ञानिक) द्वारा विकसित एक उपकरण है । इसका उपयोग किसी भी वस्तु (सजीव एवं निर्जीव) के चारों ओर व्याप्त सूक्ष्म ऊर्जा (सकारात्मक एवं नकारात्मक) तथा प्रभामंडल को मापने के लिए किया जाता है । यूटीएस पाठ्यांक वस्तु के चारों ओर स्थित नकारात्मक, सकारात्मक एवं कुल प्रभामंडल को मापकर उसका विवरण देते हैं । यूटीएस पाठ्यांक कैसे लिए जाते हैं तथा इनका तात्पर्य क्या है, इसकी अधिक जानकारी के लिए इस लेख का संदर्भ लें – यूटीएस पाठ्यांक (रीडिंग) की कार्यप्रणाली (शीघ्र प्रकाशित होगा) ।

इ. पाठ्यांक एवं घटनाओं के क्रम के विषय में

समय क्या घटित हुआ
प्रातः ५:१५ से ६:३० बजे तक मूलभूत पाठ्यांक : पारंपरिक पूजा होने से पूर्व साधकों के छायाचित्र एवं यूटीएस पाठ्यांक लिए गए।
प्रातः ६:३० से ७:३० बजे तक गुडी पडवा का समारोह : साधकों ने पारंपरिक पूजा में भाग लिया । समारोह की अवधि में साधकों को ईश्वर का नामजप न करने के लिए कहा गया तथा केवल पूजा से चैतन्य ग्रहण करने हेतु प्रार्थना करने के लिए कहा गया । नामजप करने से रोकने का कारण यह था कि ईश्वर के नामजप से स्वतः ही बहुत सकारात्मक प्रभाव पडता है ।
प्रातः ७:४० से ८:५५ बजे तक समारोह के उपरांत के पाठ्यांक : गुडी पडवा का पर्व मनाने के उपरांत साधकों के यूटीएस पाठ्यांक एवं छायाचित्र लिए गए ।

३.२ यूटीएस पाठ्यांक

यूटीएस पाठ्यांक के चार प्रकार हैं, नीचे दी गई तालिका में उनका वर्णन किया गया है :

यूटीएस पाठ्यांक के प्रकार विवरण
इंफ्रारेड एवं अल्ट्रावायलेट नकारात्मक ऊर्जा पाठ्यांक दो प्रकार के होते हैं और इन्हें इंफ्रारेड IR (infrared) एवं अल्ट्रावॉयलेट UV (ultraviolet) के रूप में दर्शाया जाता है । इंफ्रारेड (IR) नकारात्मक स्पंदन के छोटे रूप को दर्शाता है, जबकि अल्ट्रावॉयलेट (UV) नकारात्मक स्पंदन के तीव्र रूप को दर्शाता है ।
सकारात्मक प्रभामंडल (PA) यह सकारात्मक प्रभामंडल दर्शाता है ।
मापित प्रभामंडल (MA) यह जिस वस्तु का नाप लिया जाना है, उस विशिष्ट वस्तु के ‘कुल मापित प्रभामंडल’ (total measured aura) को दर्शाता है ।

शोध दल ने इस उपकरण का उपयोग व्यापक रूप से किया है, अर्थात ५ वर्ष की अवधि में, वस्तुओं के लगभग १०,००० सूक्ष्म पाठ्यांक (रीडिंग) लिए गए हैं । यह देखा गया है कि यूटीएस के परिणाम बहुत सटीक होते हैं और छठी इंद्रिय से प्राप्त निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं ।

गुडी पडवा का पर्व मनाने के उपरांत प्रतिभागियों के सभी यूटीएस पाठ्यांक उल्लेखनीय रूप से अधिक सकरात्मक पाए गए ।

नव वर्ष का दिन (३१ दिसंबर २०१८ – ०१ जनवरी २०१९) एवं गुडी पडवा (०६ अप्रैल २०१९) दोनों को मनाने के पूर्व एवं उपरांत के पाठ्यांकों के मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं ।

नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

कृपया ध्यान दें – १ मई २०१९ तक, आध्यात्मिक शोध दल द्वारा किसी भी व्यक्ति पर यूटीएस की सहायता से किए परीक्षण में नव वर्ष (३१ दिसंबर – १ जनवरी) के समारोह – उपरांत के पाठ्यांक में उच्चतम स्तर के नकारात्मक इंफ्रारेड एवं अल्ट्रावॉयलेट प्रभामंडल पाए गए । यह उस आध्यात्मिक प्रभाव की तीव्रता को दर्शाता है, जो प्रयोग में भाग लेनेवाले साधकों पर हुआ था तथा इस प्रकार यह समाज पर नव वर्ष समारोह के प्रभाव की तीव्रता को दर्शाता है ।

उपरोक्त सारणी से हम प्रतिभागियों पर हुए दोनों समारोह के भिन्न-भिन्न प्रभावों को देख सकते हैं । प्रयोग में भाग लेने वाले साधकों के संबंध में, उनकी साधना के कारण, कुछ दिनों में ही वे नव वर्ष का दिन मनाने के पाठ्यांकों की आध्यात्मिक नकारात्मकता से पुनः उभर सके । यद्यपि एक सामान्य व्यक्ति पर यह प्रभाव यदि अनेक सप्ताह नहीं, तो अनेक दिनों तक तो बना ही रह सकता है । यदि सामान्य आध्यात्मिक स्तर के व्यक्ति बारंबार ऐसी नकारात्मक उत्तेजनाओं के संपर्क में आएंगे, तो उनके प्रभामंडल से नकारात्मकता कभी नहीं जाएगी ।

साधिका के पहनावे के संदर्भ में एक दूसरा अवलोकन था । यह देखा गया कि जिन साधिकाओं को कष्ट थे, उनमें से जिन साधिकाओं ने ६-गज की साडी पहनी थी, उनकी तुलना में जिन साधिकाओं ने ९-गज की साडी पहनी थी, उन पर गुडी पडवा का प्रभाव बहुत सकारात्मक था । यह दर्शाता है कि शुभ अवसर पर जब साधिकाएं ९-गज की साडी पहनती हैं, तो उनके पहनावे की आध्यात्मिक सकारात्मकता (सात्त्विकता) के कारण वातावरण में व्याप्त सकारात्मकता से लाभ प्राप्त करने में सक्षम होने की उनकी संभावना अधिक होती है । एक अन्य प्रयोग में यह ध्यान में आया कि ९-गज की साडी, यदि उचित ढंग से धारण की गई हो, तो स्त्री के लिए वह सर्वाधिक सकारात्मक वस्त्र होता है ।

४. प्रयोग में भाग लेनेवाले साधकों की टिप्पणियां

प्रयोग में भाग लेनेवाले साधकों से एक सर्वेक्षण के माध्यम से पूछा गया कि उन्हें गुडी पडवा समारोह से पूर्व, समारोह के समय एवं उसके पश्चात कैसा अनुभव हुआ । उनसे पूर्व में नव वर्ष की पार्टी के समय हुए उनके अनुभवोेें के विषय में एक अलग सर्वेक्षण में पूछा जा चुका था । नियमित साधना करने के कारण, उनकी छठी इंद्रिय की क्षमता जागृत हो गई है, इसलिए ऐसे सहभागी होते समय वहां व्याप्त सूक्ष्म स्पंदनों को अनुभव करने में वे सक्षम होते हैं ।

जब उनसे यह प्रश्न पूछा गया कि सूक्ष्म स्पंदन के स्तर पर प्रत्येक समारोह की १ से १० के पैमाने पर कैसे तुलना करेंगे, तो दिए गए औसत अंक निम्नलिखित हैं । (कृपया ध्यान दें कि १ अत्यधिक नकारात्मक स्पंदनों को दर्शाता है तथा १० अत्यधिक सकारात्मक स्पंदनों को दर्शाता है ।)

नव वर्ष के विपरीत गुडी पडवा मनाने का आध्यात्मिक प्रभाव

नए साल की पूर्व संध्या पार्टी और गुडीपडवा समारोह में भाग लेने पर उन्हें हुए अनुभव की एक संक्षिप्त तुलना नीचे दी गई है ।

पहलू नव वर्ष की रात गुडी पडवा 
पूर्व साधकों ने सांसारिक विचारों में वृद्धि होना अनुभव किया, देहभान एवं अहं से संबंधित विचार अधिक थे । साधना एवं ईश्वर से संबंधित विचार अल्प हुए । साधकों को आध्यात्मिक अंतर्मुखता, शांति एवं समारोह में भाग लेने का अवसर मिलने हेतु कृतज्ञता अनुभव हुई ।
दौरान मन में ईश्वर के विचार नहीं थे, बल्कि मौजमस्ती पर ध्यान था । यौन विचारों में वृद्धि हुई तथा अन्य इच्छाओं में भी समग्र वृद्धि हुई । साधकों ने कष्टदायी स्पंदनों को भी अनुभव किया । साधकों ने समारोह में व्याप्त चैतन्य को अनुभव किया तथा स्वयं पर आध्यात्मिक उपचार होते अनुभव किया । कुछ साधकों की भाव जागृति हुई ।
पश्चात साधकों को थकान अनुभव हुई तथा नकारात्मक विचारों में वृद्धि होने का अनुभव हुआ । उदासीनता थी तथा साधना करने की तडप का अभाव लगा । कुछ साधकों पर ये प्रभाव २ दिनों तक रहे । समारोह में भाग लेने हेतु सुबह शीघ्र उठने पर भी साधकों को हल्का और उत्साहपूर्ण लगा । कुछ को विचार अल्प होना तथा आध्यात्मिक कष्ट अल्प होना अनुभव हुआ । ऐसा लग रहा था कि यह अनुभव नव वर्ष की रात वाली पार्टी की तुलना में कहीं अधिक उत्साहपूर्ण और सकारात्मक था ।

उपरोक्त सूत्रों से, आध्यात्मिक स्तर पर नव वर्ष की दो पद्धतियों को सम्मिलित करने के मध्य के अंतर का एक स्पष्ट चित्र सामने आता है । साधकों को इन दोनों समारोहों की तुलना करते समय कैसा अनुभव हुआ, इससे संबंधित उनकी टिप्पणियां नीचे दी गई हैं ।

  • गुडी पडवा मनाते समय विचारों का स्वरूप अधिक पवित्र, स्पष्ट एवं अधिक सकारात्मक थे । इसके विपरीत, नव वर्ष की पूर्व संध्या की पार्टी के समय माया का आकर्षण बहुत स्पष्ट दिखाई देता है, किंतु साथ ही वह क्षणिक तथा अस्थाई होता है । गुडी पडवा का अनुभव अधिक पवित्र एवं अधिक सुखद था । वास्तव में इन दोनों समारोहों के मध्य कोई तुलना नहीं है, अपितु यहां तम एवं सत्त्व, ऊंचे स्वर एवं शांतिमय, बनावटी एवं प्राकृतिक, अल्पायु एवं चिरकालीन तथा बहिर्मुखता एवं अंतर्मुखता के मध्य पूर्ण विरोधाभास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है । नव वर्ष की पूर्व संध्या की पार्टी के विषय में सोचने से एक बहुत कष्टदायी चित्र उभरता है ।
  • नव वर्ष की पूर्व संध्या की पार्टी में, मैंने अनुभव किया कि भले ही ऐसा लग रहा था कि हम आपस में मौज मस्ती कर रहे हों; किंतु मैं स्वयं पर काला आवरण निर्माण होते हुए स्पष्ट रूप से अनुभव कर सकता था तथा फलस्वरूप मुझमें से सकारात्मक शक्ति क्षीण होती जा रही थी । इसके साथ, सम्पूर्ण वातावरण बहिर्मुखता एवं अहं को बढाने की दिशा में निर्मित हुआ था । उपस्थित लोगों से प्रक्षेपित होनेवाले यौन स्पंदन वहां अत्यधिक मात्रा में व्याप्त थे । जबकि गुडी पडवा के समारोह में, वातावरण की सकारात्मकता में निरंतर वृद्धि हो रही थी । हमें आध्यात्मिक उपचार होने के साथ अंतर्मुखता भी अनुभव हो रही थी ।
  • ३१ दिसंबर के पूर्व की रात्रि को, मैं बेचैन था तथा मेरे मन में ‘पार्टी में धूम मचाने’ के विचार चल रहे थे । इसके विपरीत, गुडी पडवा से पूर्व की रात्रि में मुझे शांति अनुभव हो रही थी । मुझे अंदर से शांति तथा प्रसन्नता का अनुभव हो रहा था । नव वर्ष की संध्या की पार्टी का अगला दिन मेरे लिए बहुत बुरा था; क्योंकि मुझे कुछ भी करने की इच्छा नहीं हो रही थी । मुझे लग रहा था कि मेरी सारी ऊर्जा क्षीण हो चुकी है । गुडी पडवा के अगले दिन, मुझे ताजगी भरा (नया) एवं उत्साहपूर्ण लग रहा था । मुझे शांति अनुभव हो रही थी, मेरा मन अधिक स्थिर था तथा उत्साह के साथ मैं अनेक कार्य पूर्ण कर पा रहा था ।

५. नव वर्ष एवं गुडी पडवा के मध्य कुछ भिन्नताएं

हममें से जो लोग नए वर्ष के उत्सव में सम्मिलित होते हैं, वे कदाचित ही इसके आध्यात्मिक परिणामों के विषय में सोचते होंगे । हम ऐसे आयोजनों में भाग इसलिए लेते हैं; क्योंकि यह एक आदर्श है तथा हम कभी भी उसकी यथास्थिति पर सवाल नहीं उठाते हैं ।

आपके लिए इस पर विचार करने हेतु, आध्यात्मिक शोध दल ने दोनों प्रकार के समारोहों के मध्य एक तुलनातमक सारणी तैयार की है । दोनों प्रकार के समारोह के मध्य कुछ भिन्नताओं, तथा इन भिन्नताओं के कारण समारोह में भाग लेने वाले लोगों पर उनके परिणामकारी प्रभावों को आगे दर्शाया गया है

पहलू नव वर्ष का दिन गुडी पडवा (पारंपरिक तरीके से मनाया गया)
पर्व मनाने के दिन का समय मध्यरात्रि (तथा पूरी रात) सूर्योदय
वर्ष के इस समय का वातावरण अनुपजाऊ एवं ठंड (उत्तरी गोलार्द्ध में) वसंत एवं फसल काटने का मौसम आरंभ
धूम्रपान, मादक पदार्थ एवं मद्यपान में लिप्त होने की इच्छा अधिक शून्य
परिधानों के माध्यम से अहं, यौन व्यवहार, आध्यात्मिक अतिसंवेदनशीलता में वृद्धि अंतर्मुखता एवं सात्त्विकता, आध्यात्मिक संरक्षण

उदाहरण: ६-गज अथवा ९-गज की साडी पहनना ।

उत्सव मनानेसे चित्त पर प्रभाव पडना बहिर्मुखता, यौन विचार आध्यात्मिक अंतर्मुखता, भाव, ध्यानावस्था
अगले दिन अनुभव होना यदि समारोह उत्साहपूर्वक मनाया गया हो, तो प्रायः अगले दिन थकान अनुभव होती है और पुनः सामान्य होने में समय लगता है समारोह में उपस्थित लोगों को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से अधिक सकारात्मक अनुभव होता है । सूक्ष्म स्तर पर, उपस्थित लोग आध्यात्मिक रूप से सक्रिय होते हैं ।
अध्यात्म एवं आध्यात्मिक उन्नति के विचार नहीं होते होते हैं
समारोह के समय सबसे सर्वाधिक सक्रिय सूक्ष्म गुण तमोगुण: मध्यरात्रि दिन का सबसे तामसिक समय होता है सत्त्वगुण: सूर्योदय का समय दिन का सबसे सात्विक समय होता है
अनिष्ट शक्तियों का प्रभाव अधिकतम गतिविधि न्यूनतम गतिविधि
भाग लेने (सम्मिलित होने) के प्रभाव अनिष्ट शक्तियों द्वारा नियंत्रित होने की संभावना बढना (१) अनिष्ट शक्तियों दारा नियंत्रित होने की संभावना न्यून होना (१)

संक्षेप में :

१. इसके साथ ही, यदि कोई पूरे वर्ष ऐसी पार्टियों में भाग लेता रहता है, तो उसके प्रभावित होने की संभावना बहुत अधिक हो जाती है । इसके विपरीत, नियमित रूप से गुडी पडवा जैसी आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने से सकारात्मकता में वृद्धि होती है एवं अनिष्ट शक्तियों द्वारा आक्रमण किए जाने की संभावना अल्प हो जाती है ।

जिस प्रकार लोग नव वर्ष की संध्या पर पार्टियां तथा कार्यक्रम करने की योजना बनाते हैं, आध्यात्मिक शोध से ज्ञात हुआ है कि अनिष्ट शक्तियां भी नव वर्ष की संध्या के लिए योजना बनाती हैं ताकि वे समाज पर अपने नियंत्रण को बढाने के लिए लोगों का अधिकतम लाभ उठा सकें

नेशनल इंश्योरेंस क्राइम ब्यूरो, यूएसए के अनुसार, वर्ष में सबसे अधिक कार चोरी नव वर्ष की छुट्टियों में होती है । यद्यपि सर्वाधिक आपराधिक घटनाएं नव वर्ष के दिन होती हैं, किंतु नव वर्ष की पूर्व संध्या के दिन भी वाहन चोरी में वृद्धि होती है (nicb.org, २०१८) । दूसरे अपराधों में भी वृद्धि होती है जैसे घरेलू हिंसा, मादक पदार्थों के अधीन होना, सार्वजनिक उन्मत्तता, मदिरा पीकर गाडी चलाना इत्यादि । उदाहरण के लिए, न्यू साउथ वेल्स (NSW), ऑस्ट्रेलिया ब्यूरो ऑफ क्राइम स्टेटिस्टिक्स एंड रिसर्च ने बताया है कि एनएसडब्ल्यू पुलिस द्वारा नव वर्ष के दिन प्रविष्ट की गई घरेलू हिंसा की संख्या पूरे वर्ष में सबसे अधिक है (bocsar.nsw.gov.au, २०१८).

उपरोक्त बिंदु नव वर्ष के संबंध में दो प्रकार के समारोह के परिप्रेक्ष्य में हैं । यदि कोई उपरोक्त बिन्दुओं पर थोडी गहनता से विचार करे, तो नव वर्ष की संध्या तथा दिन को मनाने के इस मनमाने दिनांक और समय के चयन की अर्थहीनता पर सवाल उठाया जा सकता है । किसी शुभ समारोह अथवा कार्यक्रम को मध्यरात्रि में मनाए जाने पर वे स्वाभाविक रूप से वातावरण में नकारात्मक स्पंदनों द्वारा प्रभावित होते हैं । दूसरा चिंताजनक प्रचलन यह है कि आजकल युवा पीढी के लिए प्रत्येक सप्ताहांत (छुट्टी के दिन) में डांस क्लबों में पूरी रात पार्टी करना एक सामान्य बात हो गई है । उन्हें यह ज्ञात नहीं है कि वे नव वर्ष के प्रयोग में भाग लेने वाले साधक की तुलना में इससे अधिक मात्रा में हानिकारक रूप से प्रभावित होंगे । जब बार बार ऐसा होता है, तब नकारात्मकता दूर करने की संभावना नहीं रह जाती । परिणामस्वरूप शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर दीर्घकालीन हानिकारक प्रभाव पडेंगे ।

६.  समापन टिप्पणियां

जीवन का उद्देश्य आध्यात्मिक उन्नति करना है अत: हमें वातावरण में आध्यात्मिक नकारात्मकता को बढाने का प्रयास तो नहीं ही करना चाहिए, जो प्रत्यक्ष रूप से समाज की आध्यात्मिक उन्नति को बाधित करता है । आदर्श रूप से, नव वर्ष का दिन ऐसा होना चाहिए कि उस दिन ईश्वर के प्रति बीते वर्ष में उनकी कृपा के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ आध्यात्मिक उन्नति के लिए अपने संकल्प को हम पुनः दोहराएं ।

रातभर पार्टी करने जैसे नव वर्ष समान समारोहों से वातावरण की नकारात्मकता में विविध प्रकार से अत्यधिक वृद्धि होती है तथा इस प्रकार इससे  आध्यात्मिक स्तर पर समाज गंभीर रूप से प्रभावित होता है । दुर्भाग्यवश, सूक्ष्म कष्टदायी स्पंदनों को अनुभव करने की असमर्थता के कारण, समाज नव वर्ष के उत्सव तथा इसके दुष्प्रभावों से अनजान रहकर निरंतर इसे मनाता जा रहा है ।

संस्कृति के आधार पर, नव वर्ष का दिनांक भिन्न भिन्न हो सकता है । आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य से, इस प्रकार के समारोह मध्यरात्रि (रात के समय) में अथवा सूर्यास्त के उपरांत नहीं होने चाहिए; अपितु सुबह के समय होने चाहिए । जब समारोह आध्यात्मिक उन्नति (वैश्विक सिद्धांतों के अनुसार) अथवा आध्यात्मिक सकारात्मकता (सात्त्विकता) की दिशा में (को ध्यान में रखकर) मनाया जाएगा, केवल तभी सकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होंगे और समाज को लाभ प्राप्त हो सकता है ।