HIN-Revealing clothing in women

१. परिचय

वर्तमान समय में लोगों में उत्तेजक तथा तंग कपडों के प्रति बढते आकर्षण के कारण महिलाओं के फैशन में ‘मादकता’ एक प्रमुख विषयवस्तु बन गया है । शरीर की तुलना में वस्त्र का अनुपात उल्लेखनीय रूप से अल्प हो गया है जैसे कि अब कुछ महिलाएं देह-प्रदर्शन करने के लिए कभी-कभी इस सीमा तक देह प्रदर्शित करनेवाले वस्त्र पहनती हैं कि वे लगभग नग्न ही दिखाई देती हैं ।

आधुनिक फैशन एवं वेशभूषा अब शील (लज्जा) के लगभग संपूर्ण परित्याग कर दिए जाने का संकेत करते हैं, शील एक सद्गुण है किंतु अब इसे चलन से बाहर (अप्रासंगिक) माना जाता है।

२. अंग-प्रदर्शक वस्त्रों के प्रकार

‘‘दृश्य को देखने वाला (द्रष्टा) दृश्य में बद्ध (प्रभावित) हो जाता है ।’’ - परम पूजनीय डॉ.आठवले

कुछ स्त्रियों को अति साहसिक ओछे वस्त्र पहनना भाता है । ऐसे अनेकों कारण हैं जो उन्हें अपनी देह को प्रदर्शित करने के लिए विवश करते हैं । ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपना सारा ध्यान अपने वस्त्र-विन्यास द्वारा अपनी देह को दिखाने के विभिन्न उपाय ढूंढने में लगाती हैं । अल्प परिधानों के कुछ प्रकार नीचे दिए गए स्लाइड शो में दर्शाए गए हैं ।

(संपादक की टिप्पणी : इस प्रकार के चित्र दिखाना SSRF की कार्य-परिधि से बाहर है; किंतु समाज में जागरूकता निर्माण करने के लिए ऐसा कर रहे हैं ।)

३. अन्यों पर प्रभाव

उत्तेजक वस्त्र पहनी हुई स्त्री के समीपस्थ लोगों पर वास्तव में क्या प्रभाव पडता है ?

    • इस प्रकार के वस्त्र धारण की हुई स्त्री को अविवेकी, पतित अथवा स्वेच्छाचारी स्त्री के रूप में देखा जाता है । इस स्थिति में पुरुष वास्तव में उसकी मनुष्यता की ओर आकृष्ट न होकर केवल उसकी देह के प्रति आकर्षित होगा।
    • कोई पुरुष ऐसे वस्त्र पहने हुए स्त्री के अंग-प्रदर्शक वस्त्रों को स्त्री की यौन-क्रिया के प्रति अधिक रूचि के प्रचार के रूप में देख सकता है ।
    • स्त्री द्वारा पहने जानेवाले वस्त्रों के आधार पर कुछ लोग उनकी वृत्ति का मूल्यांकन करते है, इस कारण अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहननेवाली स्त्रियों के सम्मान खोने की प्रबल संभावना होती है ।
‘‘ईश्वर अर्थात आनंद - जहां तनिक भी दुख न हो ।’’ - परम पूजनीय डॉ.आठवलेजी
  • कुछ लोग मानते हैं कि वेशभूषा संवाद का ही एक स्वरूप है । कुछ लोग व्यक्ति व्यक्ति कैसा दिखता है तथा उसकी वेशभूषा से उसके व्यक्तित्व का आंकलन करते हैं । इसप्रकार, वेशभूषा यह दर्शाती है कि अमुक व्यक्ति स्वयं में एवं अन्य किसी के प्रति कैसा है । जिसप्रकार जब व्यक्ति सैनिक की पोशाक धारण किए रहता है तब वह सैनिक के रूप में पहचाना जाता है; अथवा उपचारिका (नर्स) जब अस्पताल की पोशाक में होती है तब ही वह नर्स के रूप में पहचानी जाती है, ठीक इसी प्रकार कुछ लोग स्त्री का आंकलन उसके पहनावे के आधार पर करते हैं और अंग-प्रदर्शक वस्त्र उन्हें उस महिला को दुराचारी तथा ध्यान आकर्षित करनेवाली स्त्री के रूप में देखने पर विवश करते हैं ।
  • साधारणत:, अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहननेवाली महिला द्वारा प्रस्तुत दृश्य उत्तेजना से पुरुष यौन रूप से उत्तेजित होते हैं । परिणामस्वरूप पुरुष और महिला दोनों में यौन-इच्छा बढती है ।
‘‘लोग सुख चाहते हैं परंतु आनंद यह सर्वोच्च सुख है | हम क्या चाहते हैं, यह इस पर निर्भर करता है – स्थायी सुख आनंद है अथवा सुख और उसके फलस्वरूप मिलनेवाला दुःख ?’’ – परम पूज्य डॉ. आठवले

 

. अंगप्रदर्शक वस्त्र पहननेवाली महिलाओं के संबंध में पुरुषों की कुछ टिप्पणियां

    • कुछ पुरुष दावा करते हैं कि वे शालीन वेशभूषावाली महिला का अधिक आदर करेंगे ।
    • जो महिलाएं अपनी शारीरिक विशेषताओं की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं, प्राय: देखा गया है कि उनके मन के विचार भिन्न ही होते हैं तथा उनमें स्व-नियंत्रण का अभाव और नैतिक उत्तरदायित्वहीनता होती है ।
    • कुछ लोग असंतोष व्यक्त करते हैं कि ढंकने के लिए और कल्पना करने के लिए कुछ भी न रहने के कारण कोई कौतुहल शेष नहीं रहता । नवीनता खो जाती है । कभी-कभी इस कारण से पुरुषों की यौन-इच्छा में कमी आ जाती है ।
“‘‘वास्तविक आनंद का अनुभव स्व-नियंत्रण द्वारा ही कर सकते हैं ।’’” – परम पूजनीय डॉ. आठवलेजी
  • मौलिक स्तर पर, पुरुष किसी सबंध के प्रति प्रतिबद्धता में से लैंगिक इच्छा को सरलतापूर्वक पृथक कर सकता है और तदनुसार ही महिला से व्यवहार करता है ।
  • यदि उनकी महिला साथी अन्य पुरुषों को आकर्षित करने के लिए कोई पोशाक पहन रही है, तब पुरुषों को लगता है कि उन्हें मात्र उपयोग किया जा रहा है और वे अपमानित भी अनुभव करते हैं ।

५. पहननेवाले पर प्रभाव

५.१ अंगप्रदर्शक वस्त्र से शरीर पर होनेवाले दुष्प्रभाव

“‘‘यह सडक पर कोर्इ मूल्यवान वस्तु रखकर चले जाने के समान है | पश्चात यदि कोई उसे चुराता है, तब हमें क्रोध आता है |”’’ – परम पूजनीय डॉ.आठवलेजी

उदाहरणार्थ, एक नए अध्ययन के अनुसार, ब्रिटन के एक तिहाई लोग यह मानते हैं कि जो महिलाएं प्रेमविलासिता पूर्ण ढंग से वर्तन करती हैं वे आंशिक अथवा पूर्ण रूप से अपने साथ बलात्कार होने के लिए उत्तरदायी होती हैं । अध्ययन में यह भी पाया गया है कि एक चौथाई से अधिक का यह भी मानना है कि यदि महिला उत्तेजक अथवा अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहनती है, तब वह अपने साथ बलात्कार होने में आंशिक रूप से तो उत्तरदायी होती ही है । – स्रोत: Daily Mail, UK

“दुकान में जब sgtकिसी वस्तु का प्रदर्शन होता है, व्यक्ति को उसे लेने की इच्छा होती है | अब वही रास्ते पर उपलब्ध है |’’” – परम पूजनीय डॉ.आठवलेजी

प्रत्येक २ मिनट में एक अमरीकी का यौन शोषण होता है | प्रत्येक वर्ष औसतन २३७,८६८ (१२ वर्ष अथवा अधिक आयु के) लोग यौन शोषण से पीडित होते हैं । यौन शोषण से पीडितों में से ४४ प्रतिशत १८ वर्ष की आयु से कम तथा ८० प्रतिशत ३० वर्ष से कम है । हाल के वर्षों में, बलात्कार में २५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है । – स्त्रोत : RAINN, USA

revealing-womens-clothes-sweden-150x150

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्ष २०११ में प्रत्येक १००,००० निवासियों में ६९ पर बलात्कार के प्रकरणों के साथ यूरोप के स्वीडेन में बलात्कार की दर सर्वाधिक है । वर्ष २०१० के एमनेस्टी ब्यौरे (रिपोर्ट) में कहा गया : ‘‘“स्वीडेन में, आधिकारिक अपराध के आंकडों के अनुसार, पिछले २० वर्षों में बलात्कार के प्रविष्ट प्रकरण चार गुना बढे हैं ।”’’ – स्त्रोत : International Business Times

 

अत: हम जो भी देखते हैं, उसका प्रभाव हम पर होता है | यदि हम ईश्वर के पूजास्थान को देखें, तब हमें अच्छे और पवित्र विचार आते हैं | परंतु यदि हम कुछ नकारात्मक देखते हैं, तब हमारा मन भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है | समाज में हमारा व्यवहार हमारे साथ-साथ दूसरों पर भी प्रभाव डालता है | – परम पूजनीय डॉ.आठवलेजी

 

women-protest

कुछ स्त्रियों का विचार है कि तामसिक प्रवृत्ति के पुरुषों का ध्यान आकर्षित करने में उनके वस्त्र-विन्यास का कोई योगदान नहीं है । तथापि वास्तव में, अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहनना स्त्रियों के लिए अत्यधिक संकटपूर्ण है । कृपया नीचे दी गई सारणी देखें ।

स्थान जहां स्त्री है

अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहनी हुई स्त्री के साथ बलात्कार होने की संभावना

शहर के किसी मार्ग पर

३० प्रतिशत

किसी प्राकृतिक स्थान पर अकेले

५० प्रतिशत

पुरुष के साथ कक्ष में अकेले

७० प्रतिशत

५.२ मानसिक स्तर पर

“‘‘अन्यों का ध्यान आकर्षित करने के लिए जो महिलाएं उत्तेजक प्रकार के परिधान पहनती हैं, वे यह नहीं समझती कि अंग प्रदर्शन द्वारा अधिक से अधिक १०-१५ वर्षों तक ही वे अन्यों का ध्यान आकर्षित कर पाएंगी और उसके पश्चात वे वृद्ध होंगी तथा उनका आकर्षण अल्प हो जाएगा । यदि कोई (मानसिक स्तर पर) कुछ अच्छा लिखता है, तब वह लोगों को ४०-५० वर्षों तक रोचक लग सकता है । यदि कोई (बौद्धिक स्तर पर) कुछ महत्वपूर्ण शोध करता है अथवा कोई आविष्कार करता है, तब लोग उसे सैकडों वर्षों तक स्मरण कर सकते हैं । आध्यात्मिक स्तर जितना अधिक, ध्यान आकर्षित करने की इच्छा उतनी अल्प । यद्यपि आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नत व्यक्ति को प्रसिद्धि की लालसा नहीं होती, तब भी लोग उन्हें सहस्त्रों वर्षों तक स्मरण रखते हैं ।”’’ – परम पूजनीय डॉ.आठवलेजी
  • एक स्त्री इस बात से क्रोधित होती है कि उसे एक वस्तु के रूप में देखा जा रहा है । (जब समाज ‘देह-छवि’ पर केंद्रित होता है, तब शरीर को व्यक्तिपरक रूप में अनुभव न कर उसे केवल एक वस्तु के रूप में देखा जाता है)
  • उसे यदि दुराचारी और अनैतिक समझा जाए तब वह अपमानित अनुभव करती है ।
  • वह ध्यान आकर्षित करना चाहती है परंतु उसे अनुचित प्रकार का ध्यान मिल रहा है ।
“‘‘व्यक्ति सुंदर दिख सकता है और उसका दिखावा भी कर सकता है, परंतु वृद्ध होने के उपरांत कोई भी उसकी ओर नहीं देखेगा । उस समय निराशा आती है । अत्यधिक ध्यान उस शरीर की ओर दिया जाता है जिसका वृद्ध होना और नष्ट होना अटल है । इसके विपरीत, जब आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नत व्यक्ति वृद्ध होते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है, लोग तब भी उन्हें स्मरण रखते हैं ।’’” – परम पूजनीय डॉ. आठवलेजी
  • एक औसत स्त्री स्वयं का मूल्यांकन अपनी आंतरिक सुंदरता के आधार पर न कर अपनी वाह्य सुंदरता के आधार पर करती है।
  • इसलिए भले ही बाह्यत: वह आकर्षक लगे; परंतु भीतर से वह खोखले खालीपन का अनुभव करती है ।
  • उसकीविचार-प्रक्रियास्वार्थऔरअपरिपक्वताद्वारा संचालित होती है।
  • उनका यौन शोषण हो सकता है इसका बोध होते ही महिलाओं में भय उत्पन्न हो सकता है ।
  • जो लडकियां सुंदर नहीं दिखती, अंग-प्रदर्शक वस्त्रों द्वारा अपने शरीर का प्रदर्शन न कर पाने के कारण उन्हें बुरा लगता है और वे निराशा में चली जाती हैं ।
“‘‘जो लोग स्वार्थी होते हैं, उनके मन में केवल अपनी आवश्यकताएं अथवा इच्छाएं होती है और ‘स्व’ ही उनका ध्यानाकर्षण का केंद्रबिंदु होता है । इसके विपरीत, साधकों के ध्यानाकर्षण का केंद्रबिंदु ईश्वर होते हैं और फलस्वरूप उन्हें ईश्वर का संरक्षण प्राप्त होता है । इसी कारण, आध्यात्मिक प्रगति करने और आध्यात्मिक दृष्टि से अपने तथा समाज के लिए हानिकारक स्वार्थ और अन्य प्रथाओं से स्वाभाविक रूप से दूर होने हेतु, हमें अध्यात्म के मूलभूत छः सिद्धांतों के अनुसार नियमित साधना करनी चाहिए ।”’’ – परम पूजनीय डॉ.आठवलेजी

५.३. आध्यात्मिक स्तर पर

    • स्त्री की शरीर के प्रति जागरूकता बढती है जबकि इसके विपरीत देहभान का अल्प होना अपेक्षित होता है, क्योंकि अध्यात्म में व्यक्ति अधिक आनंद प्राप्ति के लिए ‘शरीर के परे जाने’ की महत्वाकांक्षा रखता है ।
    • उस प्रकार के (उत्तेजक) वस्त्र पहनने के कारण मायावी शक्ति उसे घेर लेती है और काली (नकारात्मक) शक्ति उसकी ओर आकर्षित होती है ।
    • अनिष्ट शक्तियां यौन विचारों और भावनाओं को बढावा देती हैं, और कभी-कभी ये भावनाएं पागलपन की सीमा तक बढ जाती हैं ।
    • अतृप्त यौन इच्छाओंवाली कुछ अनिष्ट शक्तियां स्त्री का सूक्ष्म-स्तर पर यौन उत्पीडन करने का प्रयास कर सकती है ।
    • उस (स्त्री) की ओर थोडा भी आकर्षित हुए व्यक्ति पर अनिष्ट शक्ति नियंत्रण करके अधिकार स्थापित कर सकती है तथा उस व्यक्ति के शरीर का प्रयोग उस (स्त्री) के साथ यौन संतुष्टि का अनुभव करने के लिए कर सकती है, अथवा इससे भी बुरा यह कि शारीरिक स्तर पर उस (स्त्री) का यौन शोषण कर सकती है ।
    • वह अनिष्ट शक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करती है जो उसके शरीर का उपयोग पुरुषों को उद्देश्यपूर्ण और उच्च विचारों से विचलित करने में करती हैं – इस प्रकार उनकी विचारधारा का क्षय करती हैं और यदि उस पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह (विचारधारा) अनैतिकता में परिवर्तित हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप आध्यात्मिक अवनति हो सकती है ।
‘‘ईश्वर ने मनुष्यों को बनाया है और इसलिए हमें स्वयं से प्रश्न करना चाहिए “क्या ईश्वर को इस प्रकार व्यवहार करनेवाले अपने बच्चे अच्छे लगेंगे ?” जो हमें ईश्वर की ओर ले जाए वह अच्छा है और जो ईश्वर से दूर ले जाए वह अच्छा नहीं है ।’’ - परम पूजनीय डॉ. आठवलेजी
  • अंग-प्रदर्शक वस्त्रों के कारण, धारणकर्ता एवं वातावरण में रज-तम घटकों में वृद्धि होती है ।
  • अंगप्रदर्शक वस्त्र पहननेवाली स्त्री का ध्यान स्वयं की ओर अत्यधिक आकर्षित होने के कारण उसके अहं में वृद्धि हो सकती है ।
अनिष्ट शक्ति का प्रभाव अनिष्ट शक्ति का प्रभाव (प्रतिशत में)

समयावधि
(उपरांत)

अहं में वृद्धि (प्रतिशत में)

अर्जित पाप (प्रतिशत में)

अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहननेवाली स्त्री

५ घंटे

५*

दर्शक

१ घंटा

साधना में बाधा

* यह मात्र एक घटना के लिए है । यदि कोई अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहनना चालू रखे, तदनुसार अधिक पाप संचित होते जाते हैं ।

६. सारांश

  • हमारा सुझाव है कि अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहनने से दूर रहें ।
  • अंग-प्रदर्शक वस्त्र पहनने वाली स्त्री की ओर अनिष्ट शक्तियां आकर्षित होती हैं तथा उसे एवं वातावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं ।
  • उचित और अनुचित के मध्य अंतर कर पाने के लिए तथा कोई व्यक्ति अथवा वस्तु सुखद अथवा कष्टदायक स्पंदन प्रक्षेपित कर रहा है यह समझने के लिए, साधना आवश्यक है । जब कोई अध्यात्म के मूलभूत छः सिद्धांतों के अनुसार साधना करता है, तब वह अनिष्ट शक्ति के प्रभाव से रहित जीवनशैली का चयन करने में और एक सात्विक जीवनयापन  करने में समर्थ हो जाएगा ।