अलंकारों की कलाकृति – भाग १

अलंकारों की कलाकृति - भाग १

१. स्त्रियों के अलंकारों की कलाकृति के आध्यात्मिक पहलुओं की प्रस्तावना

जब मर्लिन मुनरो ने ‘डायमंड आर ए गर्ल्र्स बेस्ट फ्रेंड’, इस पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया, वह एक यादगार  प्रस्तुति थी, जो कि संक्षेप में अलंकारों के प्रति स्त्रियों  के लगाव  को दर्शाता है ।

अलंकार पारंपरिक रूप से स्त्रियों का क्षेत्र है । जो स्त्रियों को बहुत अधिक प्रिय होते हैं । उन भावनाओं की सम्पूर्ण व्यापकता (विस्तार) एवं गहराई का अनुमान लगा पाना बहुत कठिन है, जो कि एक महिला अपने अलंकारों के संबंध में अनुभव करती है । अपने सौंदर्य और भावनाओं से भी परे, अलंकार स्त्रियों के व्यक्तित्त्व से अविभाज्य रूप से जुडे होते हैं तथा उसकी आतंरिक प्रवृत्ति का एक भाग होते हैं । प्रत्येक अलंकार के साथ उसकी स्मृतियां जुडी रहती हैं, यह सामाजिक रूतबा का एक प्रतीक, संपत्ति, विरासत अथवा प्रेम के एक चिन्ह के रूप में हो सकता है । कुछ लोगों के लिए, इसके साथ धार्मिक भावनाएं जुडी हो सकती हैं तथा यह आध्यामिक संरक्षण प्राप्त करने के एक माध्यम को दर्शाती है ।

एक महिला के लिए, अलंकारों का चयन एवं उनका क्रय करना एक बहुत उलझाने वाला और गहन अनुभव का होता है । चाहे अलंकार बडा हो अथवा छोटा, उसे चाहे उत्कृष्ट संकलनवाले दुकान (स्टोर) से लिया गया हो अथवा एक साधारण दुकान से, अलंकार क्रय करते समय बहुत विचार विमर्श किया जाता है ।

किंतु, क्या अलंकार के आर्थिक मूल्य तथा सौन्दर्यात्मक आकर्षण से भी परे कुछ ऐसा है, जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है ?

संक्षेप में इसका उत्तर है ‘हां’।

आध्यात्मिक शोध ने दर्शाया है कि अलंकारों की कलाकृति के आधार पर ही, यह निश्चित होता है कि उससे सकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होंगे अथवा नकारात्मक तथा तदनुसार उसे धारण करने वाले को सूक्ष्म स्तर पर प्रभावित करेगा ।

इस ३ भागों की लेख श्रृंखला में,  हम इस अवधारणा पर विस्तार से चर्चा करेंगे और अपने पाठकों के साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अलंकारों के विभिन्न पहलुओं को साझा करेंगे ।

भाग १ – अलंकार की प्रत्येक कलाकृति से उसके अपने सूक्ष्म स्पंदन (सकारात्मक अथवा नकारात्मक) प्रक्षेपित होते हैं

भाग २ – कौनसे ऐसे कारक (जैसे प्रयुक्त धातु, रत्न, इत्यादि) हैं, जिनका अलंकारों से प्रक्षेपित होने वाले सकारात्मक अथवा नकारात्मक प्रकार के सूक्ष्म स्पंदनों में योगदान होता है

भाग ३ – अलंकारों की कलाकृति उसे धारण करने वाले को कैसे प्रभावित करती है

२. मूल अवधारणाएं 

प्रत्येक वस्तु में उससे सम्बन्धित सूक्ष्म स्पंदन व्याप्त होते हैं ।

अध्यात्मशास्त्र के अनुसार, सृष्टि की रचना मूल त्रिगुणों से हुई है, सत्त्व, रज एवं तम । ये तीनों घटक सजीव-निर्जीव, स्थूल-सूक्ष्म वस्तुओं में विद्यमान होते हैं । सत्त्व गुण प्रधान होने से व्यक्ति में ज्ञान एवं पवित्रता आती है, रज गुण क्रियाएं करवाता है, तथा तम अज्ञानता एवं निष्क्रियता उत्पन्न करता हैं । किसी भी वस्तु से प्रक्षेपित स्पंदन (सकारात्मक अथवा नकारात्मक) उसके सूक्ष्म मूल सत्त्व, रज एवं तम घटकों के अनुपात पर निर्भर होते हैं । इन सूक्ष्म स्पंदनों को अपनी पंचज्ञानेंद्रिय, मन अथवा बुद्धि से अनुभव नहीं किया जा सकता, किंतु यदि किसी में छठवीं इंद्रिय की क्षमता है, तो वह यह त्वरित अनुमान लगा सकता है कि अमुक वस्तु सात्त्विक है अथवा नहीं ।

यह आध्यत्मिक सिद्धांत अलंकारों पर भी लागू होता है । अलंकारों की बनावट एवं कलाकृति के आधार पर, उनसे सकारात्मक अथवा नकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित हो सकते हैं । चूंकि इन्हें देह पर धारण किया जाता है, इसलिए हमारे प्रत्यक्ष संपर्क में होने के कारण इसका प्रभाव हम पर व्यापक रूप से पडता है । यदि वे रज तम प्रधान अधिक है और उन्हें प्रायः (बार बार) धारण किया जाता हैं, तो इससे शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक स्तर पर विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं ।

सूक्ष्म स्पंदनों पर इस प्रकार का विश्लेषण केवल अतिजागृत छठवीं इंद्रिय के प्रयोग से ही किया जा सकता है । यद्यपि, आज कल प्रभामंडल एवं सूक्ष्म ऊर्जा स्कैनरों के क्षेत्र में तकनिकी प्रगति होने से, हम कुछ स्तर तक वस्तुओं से संबंधित सूक्ष्म स्पंदनों के प्रकार एवं विस्तार को मापने में समर्थ हैं ।

३. अलंकारों से प्रक्षेपित होने वाले सूक्ष्म स्पंदनों को प्रदर्शित करने हेतु किए गए प्रयोग

पार्श्वभूमि : भारत के गोवा स्थित महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने SSRF के साथ मिलकर अलंकारों पर अनेक प्रयोग किए हैं । नीचे दिए गए प्रयोगों को यह दर्शाने के उद्देश्य से किया गया था कि किस प्रकार अलंकारों से सूक्ष्म स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं । दो परीक्षणों को औरा (प्रभामंडल) एवं ऊर्जा स्कैनरों के उपयोग से किया गया तथा तीसरा परीक्षण अध्यात्म शोध दल के सदस्यों की अतिजागृत छठवीं इंद्रिय के माध्यम से किया गया था ।

अलंकारों की कलाकृति पर किए गए प्रयोगों के निष्कर्ष पर जाएं

३.१ अलंकारों की कलाकृति पर प्रयोग – यूनिवेर्सल ऑरा स्कैनर (यूएएस) के माध्यम से

कार्यप्रणाली : इस परीक्षण के लिए, एक ऑरा (प्रभामंडल) एवं ऊर्जा स्कैनर उपयोग किया गया जिसे यूनिवेर्सल ऑरा स्कैनर कहते हैं । इस उपकरण को भारत के डॉ मन्नेम मूर्थी (एक पूर्व परमाणु वैज्ञानिक) ने विकसित किया था । यह उपकरण किसी भी वस्तु में व्याप्त सूक्ष्म ऊर्जा के प्रकार (सकारात्मक अथवा नकारात्मक) तथा उसके चारों ओर के प्रभामंडल को मापता है ।

तीन हारों (नीचे दर्शाए गए) को उनसे प्रक्षेपित होने वाली सूक्ष्म ऊर्जा का पता लगाने के लिए मापा गया । उनमें से एक हार को ‘फैशन का अलंकार, ‘कॉस्ट्यूम ज्वेलरी’ अथवा ‘खोटे अलंकार’ के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है । तथा अन्य दो हार २२ कैरट स्वर्ण (सोने) के विभिन्न कलाकृति के हार थे ।

अलंकारों की कलाकृति - भाग १

    परिणाम : तीनों हारों को यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर (यूएएस) से मापने के उपरांत निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए ।

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  • हार अ एवं हार आ दोनों से ही नकारात्मक स्पंदन प्राप्त हुए ।
  • हार ‘इ’ में कोई नकारात्मक स्पंदन नहीं थे ।
  • मात्र हार इ में ही सकारात्मक स्पंदन थे ।
  • जब हमने तीनों हारों के संबंध में कुल मापित प्रभामंडल का निरिक्षण किया, तो हार ‘इ’ में सर्वाधिक प्रभामंडल (मीटर में) था, जो कि इसकी सकारात्मकता का भी संकेत है ।

३.२ अलंकारों की कलाकृति पर प्रयोग – पोलीकॉन्ट्रास्ट इंटरफेरेंस फोटोग्राफी (पिप) तकनीक के उपयोग से

अलंकारों की कलाकृति - भाग १कार्यप्रणाली : इसके उपरांत हमने दूसरे प्रभामंडल एवं ऊर्जा स्कैनिंग तकनीक जिसे पोलीकॉन्ट्रास्ट इंटरफेरेंस फोटोग्राफी (पिप) कहते हैं, उससे रीडिंग लिए । इस तकनीक से प्रकाश के उस स्वरूप का पता चलता है जिसे नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता तथा यह रंगों के रूप में कंप्यूटर (संगणक) मॉनिटर पर प्रदर्शित होता है । वातावरण में व्याप्त सकारात्मक और नकारात्मक स्पंदनों को उन विशिष्ट रंगों द्वारा निरूपित किया जाता है जिन्हें कि मशीन में मानकीकृत किया गया है । सकारात्मक रंग आध्यात्मिक स्पंदनों को जिनमें सात्त्विकता एवं पवित्रता होती है, उसे व्यक्त करते हैं तथा नकारात्मक रंग रज-तम प्रधान स्पंदन अथवा आध्यात्मिक अशुद्धता को व्यक्त करते हैं । अतः, हम पिप चित्रों के रंगों में वृद्धि अथवा घटाव को वास्तविक रूप में माप सकते हैं, फलस्वरूप यह हमें सकारात्मक अथवा नकारात्मक स्पंदनों में वृद्धि अथवा घटाव को बताएगा । .

किनारे पर दर्शाए गए चित्र में सोने के दो हारों के पिप चित्र हैं । इनकी तुलना, जहां प्रयोग (पिप के माध्यम से) किया गया था, वहांके  वातावरण की मूलभूत गणना से की गई है ।

सर्वप्रथम, जहां एक के उपरांत एक विभिन्न हार रखे जाने थे, वहां की मेज के साथ उस खाली कक्ष की आधारभूत गणना ली गई ।

महत्वपूर्ण बात यह है कि आप देखेंगे कि प्रत्येक पिप चित्रों में रंग भिन्न भिन्न हैं । यह दर्शाता है कि प्रत्येक हार के लिए सकारात्मक एवं नकारात्मक सूक्ष्म स्पंदनों का अनुपात भिन्न है ।

 

 

 

 

 

 

 

 

परिणाम :

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प्रत्येक हार के प्रत्येक पिप चित्र से सकारात्मक एवं नकारात्मक रंगों के कुल क्षेत्र को मापा गया तथा उसकी तुलना की गई (नीचे दिए गए खडे स्तंभ के रेखा चित्र में देखें) ।

  • सोने के दोनों हारों के पिप तकनीक से प्राप्त परिणाम, पूर्व में यूएएस के उपयोग के परीक्षण से प्राप्त परिणामों के समान ही थे।
  • भले ही दोनों हार २२ कैरट सोने से बने थे, किंतु हार ‘आ’ की तुलना में हार ‘इ’, जो कि एक सोने का गोलाकार हार है, उसमें अधिक सकारात्मकता थी ।

३.३ अलंकारों की कलाकृति पर प्रयोग – अतिजागृत छठवीं इंद्रिय के उपयोग से

सूक्ष्म स्पंदनों का वास्तविक माप तथा विश्लेषण मात्र छठवीं इंद्रिय के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है । हमारे शोध दल में हमारे पास ऐसे साधक हैं जो कि व्यक्ति तथा वस्तुओं से प्रक्षेपित होने वाले सूक्ष्म स्पंदनों को वास्तविक रूप से देख सकते हैं । ऐसे साधक कलाकार प्रयोग अथवा घटना के समय क्या घटित हो रहा है, इसे दृश्य स्वरुप में देखने तथा जो देखा और अनुभव किया है, उसे चित्रित करने में समर्थ हैं । इन चित्रों को सूक्ष्म ज्ञान पर आधारित चित्र कहते है । ये चित्र अलंकारों की कलाकृति के लिए आध्यत्मिक एक्स-रे के रूप में कार्य करते हैं तथा एक सामान्य व्यक्ति को ऐसी वस्तुओं के वास्तविक स्वरुप के बारे में आध्यात्मिक आयाम की अद्वितीय झलक प्रदान करते हैं ।

सूक्ष्म में तीनों हार कैसे दिखाई दिए, इसके चित्र हमने नीचे प्रस्तुत किए हैंं ।

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ऊपर यह दिखाया गया है कि ‘हार अ’ सूक्ष्म में कैसा दिखता है – इसके चारों ओर कष्टदायी शक्ति तथा मायावी स्पंदन व्याप्त है । दोनों सूक्ष्म चित्रों में दिखने वाले गुलाबी स्पंदनों को मायावी शक्ति कहते हैं ।

इस प्रकार के नकारात्मक स्पंदन बहुत खतरनाक होते हैं क्योंकि यह एक भ्रम निर्माण करता है कि यह अच्छा है जबकि वास्तव में वह अच्छा नहीं होता । सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह अत्यधिक कष्टदायी स्पंदनों के साथ आता है, जिसे एक सामान्य व्यक्ति नहीं समझ पाता ।

अलंकारों की कलाकृति - भाग १

उपर्युक्त चित्र ‘हार आ’ का सूक्ष्म चित्र है । भले ही हार के चारों ओर स्वर्ण के कारण दैवी शक्ति का सूक्ष्म सुरक्षा कवच व्याप्त है, किंतु इसकी बनावट के कारण इससे कष्टदायी स्पंदन उत्पन्न होते हैं जो कि सोने की सकारात्मकता को निष्प्रभावी कर देते हैं ।

एक महत्त्वपूर्ण बिंदु यह है कि भले ही सोना एक धातु के रूप में सकारात्मक शक्ति को प्रक्षेपित करता है, किंतु इसकी कलाकृति के आधार पर इसकी सकारात्मकता न्यून हो सकती है अथवा इसमें से नकारात्मक स्पंदनों का भी प्रक्षेपण हो सकता है ।

अलंकारों की कलाकृति - भाग १

हार ‘इ’ के चारों ओर दिखने वाली सूक्ष्म शक्तियां बहुत अधिक सकारात्मक थी । हार ने सकारात्मक शक्ति आकर्षित एवं प्रक्षेपित की । अलंकारों को केवल आंखों से देखकर उसकी सराहना करने के अतिरिक्त भी बहुत कुछ है । हमारी पंच ज्ञानेंद्रियों से परे, ये सभी सूक्ष्म ऊर्जाएं आभूषण के चारों ओर निरंतर गतिमान रहती हैं । ऑरा (प्रभामंडल) एवं ऊर्जा स्कैनर वस्तुओं के विषय में मूलभूत सूक्ष्म जानकारी प्रदान करने में सक्षम होते हैं जिसकी पुष्टि सूक्ष्म चित्रों से प्राप्त सूक्ष्म ज्ञान से की जाती हैं ।

४.  अलंकारों की कलाकृति के प्रयोग  के मुख्य बिंदु एवं निष्कर्ष

  • सभी अलंकारों से सूक्ष्म स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं ।
  • अलंकार से प्रक्षेपित होने वाले सूक्ष्म स्पंदन, उसकी बनावट के आधार पर भिन्न भिन्न होते हैं । वे नकारात्मक अथवा सकारात्मक हो सकते हैं ।
  • सोना जिसे आध्यात्मिक रूप से सबसे शुद्ध (सात्त्विक) धातु माना गया है, किंतु यदि स्वर्ण अलंकार की कलाकृति सात्त्विक न हो तो उससे भी नकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित हो सकते हैं ।
  • अधिक पैसे देने पर भी अलंकार आध्यात्मिक रूप से नकारात्मक भी हो सकता है । केवल यदि किसीके पास छठवीं इंद्रिय की क्षमता है, तो वही जान सकता है कि क्या वह अलंकार आध्यात्मिक रूप से योग्य (मूल्यवान) है ।
  • कोई भी व्यक्ति सूक्ष्म क्षमता अथवा छठवीं इंद्रिय की क्षमता को प्राप्त कर सकता है क्योंकि अध्यात्म के वैश्विक सिद्धांतों के अनुसार नियमित साधना करने पर यह स्वतः ही प्राप्त हो जाती हैं ।